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राष्ट्रीय इस्पात नीति 2047: भारत को ग्लोबल स्टील पावरहाउस बनाने का मेगा प्लान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
7 Min Read

नई दिल्ली।

भारत सरकार वर्ष 2047 तक देश की इस्पात उत्पादन क्षमता को 600 मिलियन टन से अधिक करने की योजना बना रही है। जानिए नई राष्ट्रीय इस्पात नीति के मुख्य लक्ष्य, हरित स्टील पहल, निवेश और चुनौतियों की पूरी जानकारी।

 

🏗️ 2047 का दृष्टिकोण: भारत का इस्पात क्षेत्र नई ऊंचाइयों की ओर

भारत सरकार ने देश के औद्योगिक और बुनियादी ढांचागत परिदृश्य को नया आकार देने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। प्रस्तावित राष्ट्रीय इस्पात नीति (National Steel Policy) का लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश की सालाना इस्पात उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 600 मिलियन टन (MT) से अधिक करना है।

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इस्पात मंत्रालय के सचिव संदीप पौंड्रिक के अनुसार, यह नई नीति अगले दो दशकों के लिए भारतीय इस्पात उद्योग का मार्गदर्शक बनेगी। यह भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि, बढ़ते शहरीकरण और बुनियादी ढांचे के विस्तार की जरूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी।

 

📊 वर्तमान स्थिति बनाम 2047 का लक्ष्य

भारत का इस्पात क्षेत्र फिलहाल मजबूत स्थिति में है, लेकिन 2047 के ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने के लिए इसमें अभूतपूर्व विस्तार की आवश्यकता है:

  • वर्तमान क्षमता (FY 2025-26): लगभग 220 मिलियन टन
  • प्रस्तावित क्षमता (2047 तक): 600+ मिलियन टन
  • अनुमानित घरेलू खपत: 500 मिलियन टन से अधिक
  • निर्यात का लक्ष्य: लगभग 45 मिलियन टन (प्रत्यक्ष इस्पात या इस्पात-आधारित विनिर्मित उत्पादों के माध्यम से)

 

🔑 नई राष्ट्रीय इस्पात नीति के 5 मुख्य स्तंभ

1. उत्पादन क्षमता में ऐतिहासिक विस्तार

रेलवे, एक्सप्रेसवे, मेगा पुल, किफायती आवास, ऑटोमोबाइल और रक्षा विनिर्माण क्षेत्रों में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर नए इस्पात संयंत्रों और मौजूदा इकाइयों के विस्तार की योजना है।

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2. एमएसएमई और छोटे उत्पादकों के लिए ₹5,000 करोड़ का बूस्टर

सरकार छोटे इस्पात उत्पादकों को प्रोत्साहन देने और उन्हें आधुनिक तकनीकों से लैस करने के लिए ‘विकसित भारत इस्पात योजना’ पर काम कर रही है। इस ₹5,000 करोड़ की योजना का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाना है।

3. डीकार्बोनाइजेशन और ‘ग्रीन स्टील’ पर जोर

विश्व स्तर पर जलवायु परिवर्तन की चिंताओं को देखते हुए, भारत अपनी इस्पात तीव्रता को पर्यावरण के अनुकूल बना रहा है:

  • वर्तमान उत्सर्जन: 2.54 टन CO₂ प्रति टन कच्चा इस्पात
  • 2047 का लक्ष्य: ~1.54 टन CO₂ प्रति टन कच्चा इस्पात
  • यह पहल भारत के 2070 तक ‘नेट–जीरो Emission’ लक्ष्य के पूरी तरह अनुकूल है।

4. कच्चे माल की सुरक्षा (Raw Material Security)

600 मिलियन टन क्षमता हासिल करने के लिए भारी मात्रा में कच्चे माल की आवश्यकता होगी:

  • लौह अयस्क मांग (2047): ~772 मिलियन टन
  • कोकिंग कोल मांग (2047): ~214 मिलियन टन

इन जरूरतों के लिए सरकार विदेशी खदान परिसंपत्तियों में निवेश, वैश्विक संयुक्त उद्यमों (Joint Ventures) और आयात स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति बना रही है।

5. आयात निर्भरता में कमी और प्रतिस्पर्धात्मकता

अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान भारत में तैयार इस्पात का आयात सालाना आधार पर 29.5% बढ़कर 3.5 मिलियन टन हो गया, जिससे भारत एक शुद्ध आयातक (Net Importer) बन गया। नई नीति का मुख्य उद्देश्य घरेलू उत्पादन को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाकर आयात पर निर्भरता घटाना है।

 

💼 अर्थव्यवस्था और रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव

  1. बुनियादी ढांचे का तेज विकास: रेलवे, एक्सप्रेसवे और शहरी पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए सस्ता और गुणवत्तापूर्ण स्टील आसानी से उपलब्ध होगा।
  2. लाखों नए रोजगार: नए स्टील प्लांट, लॉजिस्टिक्स, माइनिंग और एंसीलरी उद्योगों में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे।
  3. मेक इन इंडिया को मजबूती: ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, रक्षा और भारी मशीनरी निर्माण क्षेत्रों को घरेलू इस्पात आपूर्ति से नई ताकत मिलेगी।

 

🛑 राह की प्रमुख चुनौतियां

  • पूंजी निवेश: 600 MT क्षमता तक पहुंचने के लिए अरबों डॉलर के निजी और सार्वजनिक निवेश की जरूरत होगी।
  • कोकिंग कोल की उपलब्धता: भारत के पास कोकिंग कोल के सीमित भंडार हैं, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता बनी रहती है।
  • तकनीकी परिवर्तन: कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ और डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) जैसी महंगी तकनीकों को अपनाना होगा।

 

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. राष्ट्रीय इस्पात नीति 2047 का मुख्य लक्ष्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत की इस्पात उत्पादन क्षमता को 220 मिलियन टन से बढ़ाकर 600 मिलियन टन से अधिक करना और देश को इस्पात के क्षेत्र में आत्मनिर्भर व प्रमुख निर्यातक बनाना है।

Q2. विकसित भारत इस्पात योजना क्या है?

उत्तर: यह ₹5,000 करोड़ की एक प्रस्तावित योजना है, जिसका उद्देश्य छोटे इस्पात उत्पादकों (MSMEs) को वित्तीय प्रोत्साहन देना, उनकी क्षमता बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करना है।

Q3. भारत सरकार इस्पात उद्योग में कार्बन उत्सर्जन कैसे कम करेगी?

उत्तर: सरकार प्रति टन कच्चे इस्पात पर औसतन कार्बन उत्सर्जन को 2.54 टन से घटाकर 1.54 टन करने का लक्ष्य रख रही है। इसके लिए ग्रीन हाइड्रोजन, स्क्रैप-आधारित स्टील मेकिंग और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा।

Q4. क्या राष्ट्रीय इस्पात नीति 2047 लागू हो चुकी है?

उत्तर: नहीं, सितंबर 2026 तक यह नीति एक मसौदे (Draft Proposal) के रूप में तैयार की गई है और जल्द ही इसे सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा।

 

⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख 29 सितंबर 2026 को उपलब्ध सार्वजनिक जानकारियों और इस्पात मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए प्रस्तावित मसौदे पर आधारित है। 600 मिलियन टन क्षमता का लक्ष्य एक नीतिगत प्रस्ताव है, जिसे आधिकारिक अधिसूचना के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।