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मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद: योगी सेना का बड़ा प्रदर्शन और 6 दिसंबर को कारसेवा का ऐलान; सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित अटल चौक (गांधी प्रतिमा पार्क) में बुधवार को योगी सेना (भारत) के कार्यकर्ताओं ने मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण और जमीन के मालिकाना हक को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

संगठन के उपाध्यक्ष मोहित मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन के बाद एक जनसभा का आयोजन भी किया गया। जनसभा को संबोधित करते हुए संगठन के राष्ट्रीय प्रमुख गौरव वर्मा ने स्पष्ट किया कि हालांकि श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा भूमि विवाद वर्तमान में न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत है, परंतु केंद्र सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार को न्यायालय के समक्ष इस विषय में प्रभावी और मजबूत पैरवी करनी चाहिए।

इस प्रदर्शन के दौरान संगठन ने एक बड़ा ऐलान करते हुए आगामी 6 दिसंबर को मथुरा में कारसेवा करने की घोषणा की है, जिससे इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ गई है।

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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टलने पर जताई नाराजगी, मामले को बताया ‘जिंक्स्ड‘

दूसरी ओर, इसी दिन नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़ी एक याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई।

  • आपसी सहमति की कमी पर टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट की पीठ (जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा) ने हिंदू पक्ष के विभिन्न याचिकाकर्ताओं और पक्षों के बीच आपसी सहमति न बन पाने तथा बार-बार सुनवाई टलने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
  • मामले को कहा ‘जिंक्स्ड‘: अदालत ने लगातार तारीखों के आगे बढ़ने पर मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह मामला ‘जिंक्स्ड’ (मनहूस/नज़र लग गया) है, क्योंकि बार-बार किसी न किसी वजह से सुनवाई टल रही है।
  • गुण–दोष (Merits) के आधार पर अगली सुनवाई: शीर्ष अदालत ने यह साफ कर दिया कि अब इस मामले में किसी भी ढिलाई के बिना गुण-दोष के आधार पर अंतिम व विस्तृत कानूनी बहस सुनी जाएगी। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 6 नवंबर 2026 तय की है।

कानूनी इतिहास और मुख्य विवाद का सार

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मुख्य रूप से मथुरा स्थित 13.37 एकड़ जमीन के मालिकाना हक का मामला है।

  1. हिंदू पक्ष का दावा: हिंदू पक्ष का तर्क है कि शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण के मूल जन्मस्थान (गर्भगृह) पर प्राचीन मंदिर को तोड़कर किया गया था। इस नाते यह संपूर्ण भूमि श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट एवं भगवान केशवदेव की है।
  2. जिला अदालत से हाईकोर्ट तक: मथुरा जिला अदालत ने मई 2022 में इस दीवानी याचिका को सुनवाई योग्य माना था, जिसके बाद 2023 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विवाद से जुड़े सभी मुकदमों को अपने पास स्थानांतरित (Transfer) कर लिया।
  3. अंतिम निर्णय न्यायालय के अधीन: वर्तमान में इलाहाबाद उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट दोनों ही स्तरों पर विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय न्यायिक आदेशों के माध्यम से ही तय होगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: लखनऊ में योगी सेना ने किस बात को लेकर प्रदर्शन किया?

उत्तर: योगी सेना (भारत) ने लखनऊ में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मालिकाना हक और वहां भव्य मंदिर निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

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Q2: योगी सेना ने मथुरा में किस तारीख को कारसेवा करने का ऐलान किया है?

उत्तर: संगठन ने 6 दिसंबर को मथुरा में कारसेवा करने की घोषणा की है।

Q3: सुप्रीम कोर्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में अगली सुनवाई की तारीख क्या तय की है?

उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गुण-दोष के आधार पर सुनवाई के लिए 6 नवंबर 2026 की तारीख तय की है।

Q4: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टलने पर क्या टिप्पणी की?

उत्तर: कोर्ट ने बार-बार टल रही सुनवाई और हिंदू पक्ष के बीच सहमति न बन पाने पर नाराजगी जताते हुए मामले को ‘जिंक्स्ड’ (Jinxed) करार दिया।

 

Disclaimer

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जनहित और समाचार सूचना के उद्देश्य से तैयार किया गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद से संबंधित सभी कानूनी मामले भारत के माननीय न्यायालयों में विचाराधीन हैं। लेख में दी गई जानकारियां अदालती सुनवाई और सार्वजनिक प्रदर्शनों पर आधारित हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।