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इंडिया के टॉप 1%: “शादी मेरी ज़िंदगी का सबसे बेहतरीन फैसला था”: शादी या सिंगल रहने की चर्चा पर अनिल कपूर ने कही दिल की बात

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई, अक्टूबर, 2026 : क्या एक रिश्ते को उम्र भर निभाने के लिए शादी ज़रूरी है? और यदि कोई सिंगल रहकर खुश है, तो क्या उसे शादी करनी ही चाहिए? स्टार प्लस के ‘इंडिया के टॉप 1%- द अनिल कपूर शो’ के आगामी एपिसोड में प्यार, रिश्तों और शादी को लेकर ऐसी ही दिलचस्प बातचीत देखने को मिलेगी। पहेलियों के बीच जब प्रतिभागी अपनी ज़िंदगी के किस्से साझा करते हैं, तो अनिल कपूर भी इस चर्चा में शामिल हो जाते हैं।

पुणे के सुमीत मेलवानी बताते हैं कि वे पिछले 35 साल से एक मज़बूत रिश्ते में हैं, लेकिन उन्होंने और उनकी पार्टनर ने कभी शादी नहीं की। उन्हें अपने रिश्ते को कोई नाम देने की ज़रूरत भी महसूस नहीं होती। वहीं, बड़ौदा के रोचक सक्सेना सिंगल रहकर खुश हैं। उन्हें अपनी आज़ादी और खुद के लिए मिलने वाला समय पसंद है। उनका कहना है कि वह सिर्फ परिवार की इच्छा पूरी करने के लिए शादी नहीं करना चाहते।

शादी को लेकर अनिल का अपना नज़रिया है। सुनीता के साथ अपने सफर को याद करते हुए वे कहते हैं, “मैं यह नहीं बोल सकता कि मैंने गलती की है या यह मेरी ज़िंदगी का सबसे अच्छा फैसला था। लेकिन मुझे लगता है कि शादी करना मेरी ज़िंदगी का सबसे बेहतरीन फैसला था।”

इसी बीच, गुजरात के शुभम बालांडे अपनी एक खास ख्वाहिश साझा करते हैं। वे कहते हैं कि यदि वे एक करोड़ रुपए जीतते हैं, तो अपनी पत्नी से दोबारा धूमधाम से शादी करना चाहेंगे और उन्हें दूसरे हनीमून पर ले जाएँगे। उनकी यह बात अनिल का ध्यान खींच लेती है। वे याद करते हुए हैं कि शादी के बाद सुनीता अकेले ही हनीमून पर गई थीं, क्योंकि वे शूटिंग में व्यस्त थे। शुभम की बात सुनकर अनिल कहते हैं, “आपने मुझे आइडिया दिया कि हनीमून दोबारा प्लान किया जा सकता है।”

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बिना शादी के 35 साल से रिश्ता निभा रहे सुमीत से लेकर अपनी पत्नी से दोबारा शादी करने की ख्वाहिश रखने वाले शुभम तक, हर किसी की कहानी इस बातचीत को खास बनाती है। और शायद इसी चर्चा ने अनिल को भी सुनीता के साथ दूसरे हनीमून की योजना बनाने का ख्याल दे दिया है!

देखिए ‘इंडिया के टॉप 1%- द अनिल कपूर शो’, स्टार प्लस और जियोहॉटस्टार पर।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।