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“एक पुरुष किरदार के रूप में ढलना मेरे लिए बेहद मज़ेदार अनुभव था, क्योंकि इससे मुझे एक पूरी तरह अलग लुक और व्यक्तित्व के साथ प्रयोग करने का अवसर मिला,” कहती हैं मुस्कान बामने, सोनी सब के पुष्पा इम्पॉसिबल से

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, अक्टूबर 2026: सोनी सब का पुष्पा इम्पॉसिबल पुष्पा (करुणा पांडे) की यात्रा में आने वाली नई चुनौतियों और जटिल रिश्तों को लगातार दर्शा रहा है। आगामी ट्रैक में शनाया (मुस्कान बामने) एक बिल्कुल नए अवतार में नज़र आएंगी। बापोदरा के राजनीतिक अभियान में उनकी मदद करने के लिए वह सीन का रूप धारण करती हैं और अपनी पहचान छिपाए रखने के लिए हर संभव कोशिश करती हैं।

बापोदरा, शनाया को पसंद नहीं करते, इसलिए उनकी मदद करने के लिए शनाया को एक पुरुष का भेष धारण करना पड़ता है और वह सीन नाम अपना लेती है। ढीली‑ढाली पैंट, मूंछ, सनग्लासेस और टोपी पहनने से लेकर अपनी आवाज़ और हाव‑भाव बदलने तक, इस नए अवतार में ढलने के लिए मुस्कान बामने को काफी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने कुछ विशेष तौर‑तरीकों को समझने के लिए अपने आसपास के पुरुषों का अवलोकन भी किया और अपनी आवाज़ के उतार‑चढ़ाव पर अभ्यास किया। मुस्कान के लिए एक बिल्कुल अलग लुक और किरदार के साथ प्रयोग करना बेहद मज़ेदार अनुभव रहा, खासकर इसलिए क्योंकि शनाया यह सब अच्छे इरादों से कर रही है, भले ही वह जानती हो कि उसके इन कदमों को हर कोई समझ नहीं पाएगा।

पुरुष किरदार के रूप में ढलने के अपने अनुभव के बारे में मुस्कान बामने ने साझा किया, “सीन के किरदार में ढलना मेरे लिए बेहद मज़ेदार अनुभव था क्योंकि मुझे एक बिल्कुल अलग लुक और व्यक्तित्व के साथ प्रयोग करने का मौका मिला। मैंने अपने चाचू और भाई के हाव‑भाव पर भी ध्यान दिया ताकि उनके तौर‑तरीकों को समझ सकूँ और सही आवाज़ पाने के लिए अपनी वॉइस मॉड्यूलेशन पर अभ्यास किया। मेरे कपड़ों, मूंछ, सनग्लासेस और टोपी वाले लुक ने मुझे इस किरदार में ढलने में बहुत मदद की। ऐसे किरदार निभाना और कुछ बिल्कुल अलग करने की कोशिश करना मेरे लिए हमेशा रोमांचक होता है।”

हर सोमवार से शनिवार रात 9:30 बजे सोनी सब पर पुष्पा इम्पॉसिबल देखना न भूलें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।