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कर्नाटक में सूखे का हाहाकार: नुकसान ₹60,000 करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान, 217 तालुका प्रभावित

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

बेंगलुरु।

कर्नाटक में इस वर्ष सूखे का संकट लगातार गहराता जा रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में मानसून की अनिश्चितता और बारिश की कमी के कारण किसानों पर कृषि संकट का बड़ा पहाड़ टूट पड़ा है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री जी. परमेश्वर ने स्थिति की समीक्षा करते हुए चेतावनी दी है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों का पूर्ण आकलन होने के बाद कुल आर्थिक नुकसान ₹50,000 करोड़ से ₹60,000 करोड़ के बीच पहुंच सकता है।

 

90% तालुका सूखे की चपेट में

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राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक के कुल 240 तालुकों में से 217 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया जा चुका है। इसका सीधा मतलब है कि राज्य का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इस समय गंभीर प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है।

  • 177 तालुकों की रिपोर्ट: सरकार द्वारा तैयार किए गए दूसरे ज्ञापन (Memorandum) के अनुसार, 177 तालुकों में प्राथमिक नुकसान का आकलन पूरा हो चुका है, जहां लगभग ₹46,000 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
  • 40 नए तालुका शामिल: 1 अक्टूबर को स्थिति की समीक्षा करते हुए 40 और तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है, जहाँ फिलहाल नुकसान की गणना जारी है।

 

47 लाख हेक्टेयर से अधिक फसलें तबाह

सूखे की सबसे बुरी मार राज्य के मेहनतकश किसानों पर पड़ी है।

177 तालुकों से मिली शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 47.1 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर खड़ी फसलें पूरी तरह से नष्ट या प्रभावित हुई हैं। खेती में लगाई गई लागत और उत्पादन के नुकसान को मिलाकर केवल इन क्षेत्रों में ही आर्थिक नुकसान ₹46,324.5 करोड़ आंका गया है।

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हाल ही में राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है, जिससे पीने के पानी (Drinking Water) की किल्लत में तो थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन उप-मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर का कहना है कि मई से सितंबर के बीच पड़े भीषण सूखे के कारण जो फसलें पहले ही बर्बाद हो चुकी हैं, उन्हें इस बारिश से कोई खास फायदा नहीं मिलेगा।

 

जमीनी आकलन के लिए पहुंचीं केंद्रीय टीमें

कर्नाटक सरकार द्वारा मांगी गई आर्थिक और मानवीय राहत सहायता के आधार पर केंद्र सरकार ने राज्य में तीन विशेष केंद्रीय टीमों को भेजा है। इन टीमों में कृषि, पर्यावरण, वित्त और जल संसाधन मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

यह केंद्रीय दल राज्य के विभिन्न प्रभावित जिलों और तालुकों का दौरा कर बारिश के आंकड़ों, पेयजल की उपलब्धता और फसल क्षति का जमीनी स्तर पर (Ground Zero) निरीक्षण कर रहा है।

 

तीसरे ज्ञापन की तैयारी

केंद्रीय टीमों की जांच रिपोर्ट और शेष 40 तालुकों का मूल्यांकन पूरा होने के बाद, कर्नाटक सरकार जल्द ही केंद्र सरकार को अपना तीसरा और अंतिम विस्तृत ज्ञापन सौंपेगी, जिसमें अंतिम राहत पैकेज (Relief Fund) की मांग की जाएगी।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. कर्नाटक में सूखे से कुल कितना नुकसान होने का अनुमान है?

उत्तर: राज्य सरकार के आकलन के अनुसार सूखे से कुल नुकसान ₹50,000 करोड़ से ₹60,000 करोड़ के बीच हो सकता है।

Q2. कर्नाटक के कितने तालुका सूखा प्रभावित घोषित किए गए हैं?

उत्तर: कुल 240 तालुकों में से 217 तालुका (लगभग 90%) सूखा प्रभावित घोषित किए जा चुके हैं।

Q3. कितने हेक्टेयर में फसल का नुकसान हुआ है?

उत्तर: 177 तालुकों में प्राथमिक आकलन के अनुसार लगभग 47.1 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में फसल नुकसान हुआ है।

Q4. क्या हालिया बारिश से फसलों को फायदा होगा?

उत्तर: हालिया बारिश से पेयजल उपलब्धता में मदद मिल सकती है, लेकिन मई से सितंबर के सूखे के कारण पहले ही नष्ट हो चुकी फसलों को इससे लाभ मिलने की संभावना न के बराबर है।

 

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राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय विकास, कृषि नीतियों और राहत सहायता से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट्स के लिए मातभूमि समाचार पर पढ़ें:

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध कराई गई आधिकारिक जानकारी और शुरुआती सरकारी आंकड़ों पर आधारित है। अंतिम नुकसान का आंकड़ा केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीम (IMCT) की अंतिम रिपोर्ट और राज्य सरकार के अंतिम ज्ञापन के बाद परिवर्तित हो सकता है।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।