नई दिल्ली।
भारत की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) की न्यायदान क्षमता को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया है। कानून एवं न्याय मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह ऐतिहासिक निर्णय देश की न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त तीन नए न्यायाधीश
सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किए गए तीनों न्यायाधीशों के पास विभिन्न उच्च न्यायालयों में वर्षों का समृद्ध न्यायिक अनुभव है:
- जस्टिस सुनीता अग्रवाल (Justice Sunita Agarwal): पदोन्नति से पूर्व यह गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थीं। इनका मूल उच्च न्यायालय इलाहाबाद हाई कोर्ट है।
- जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय (Justice Devendra Kumar Upadhyaya): सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति से पहले यह दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे। इनका मूल उच्च न्यायालय भी इलाहाबाद हाई कोर्ट है।
- जस्टिस अपरेश कुमार सिंह (Justice Aparesh Kumar Singh): सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति से पूर्व यह तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पद पर सेवा दे रहे थे। इनका मूल उच्च न्यायालय झारखंड हाई कोर्ट है।
नियुक्ति की प्रक्रिया और कॉलेजियम की सिफारिश
सुप्रीम कोर्ट के नए न्यायाधीशों के चयन की प्रक्रिया भारत के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा शुरू की गई थी। कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 को इन तीनों वरिष्ठ न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी थी।
इसके पश्चात, कानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा आवश्यक संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 5 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई, जिसके आधार पर महामहिम राष्ट्रपति ने इन नियुक्तियों को अंतिम स्वीकृति प्रदान की।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्थिति और प्रभाव
इस नई नियुक्ति से सर्वोच्च अदालत की कार्यप्रणाली पर निम्नलिखित सकारात्मक प्रभाव पड़ेंगे:
- कार्यरत क्षमता में वृद्धि: इन तीन न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़कर 37 हो जाएगी।
- स्वीकृत क्षमता के करीब: सुप्रीम कोर्ट की कुल स्वीकृत क्षमता 38 न्यायाधीशों की है। इन नियुक्तियों के बाद अदालत में स्वीकृत क्षमता से केवल एक पद रिक्त रह जाएगा।
- महिला प्रतिनिधित्व में मजबूती: जस्टिस सुनीता अग्रवाल की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति लैंगिक समानता और शीर्ष अदालत में महिला न्यायाधीशों की उपस्थिति को और अधिक सुदृढ़ करती है।
- लंबित मामलों में तेजी: देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीशों की संख्या लगभग पूर्ण होने से संवैधानिक पीठों के गठन, महत्वपूर्ण कानूनी विषयों पर सुनवाई और लाखों लंबित मुकदमों के त्वरित निस्तारण में तेजी आएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में किन तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति हुई है?
उत्तर: जस्टिस सुनीता अग्रवाल (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, गुजरात हाई कोर्ट), जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, दिल्ली हाई कोर्ट) और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, तेलंगाना हाई कोर्ट) की नियुक्ति हुई है।
Q2: सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत अधिकतम संख्या कितनी है?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित स्वीकृत न्यायाधीशों की कुल संख्या 38 है।
Q3: इन तीन नई नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत जजों की संख्या कितनी हो गई है?
उत्तर: इन नियुक्तियों के बाद कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो गई है।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं, सरकारी अधिसूचनाओं और समाचार स्रोतों पर आधारित है। इसे केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी कानूनी या आधिकारिक संदर्भ के लिए भारत सरकार अथवा सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट का अवलोकन करें।
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