बेंगलुरु।
कर्नाटक के जेल एवं सुधार सेवा विभाग में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बेंगलुरु सेंट्रल जेल (परप्पना अग्रहारा) के तत्कालीन चीफ सुपरिंटेंडेंट और वर्तमान DIG (उत्तर क्षेत्र) एम. सोमशेखर को एक उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी को कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश के आधार पर जेल से रिहा कराने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है।
फर्जी आदेश और ₹6 लाख की रिश्वत
पुलिस द्वारा प्रस्तुत जांच के अनुसार, मामला वर्ष 2018 का है। अपहरण व फिरौती (और हत्या के मामलों) में 2004 से सजा काट रहे कैदी शंकर ए. को 13 नवंबर 2018 को रिहा कर दिया गया था।
जांच में जेल कर्मी श्रीकांत एस. (SDA) का नाम सामने आया, जिसने कथित तौर पर 2 नवंबर 2018 की तारीख वाला फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश तैयार किया था। इस जालसाजी और रिहाई कराने के एवज में ₹6 लाख के वित्तीय लेनदेन की बात भी सामने आई है।
DIG सोमशेखर की भूमिका और गंभीर आरोप
तत्कालीन जेल अधीक्षक सोमशेखर पर आरोप है कि फर्जी दस्तावेज होने की जानकारी के बावजूद उन्होंने नियमों को दरकिनार करते हुए कैदी की रिहाई को हरी झंडी दी।
मामले में नया मोड़ तब आया जब जांच के दौरान कैदी की पत्नी ने आरोप लगाया कि उसके पति को रिहा कराने और पैरोल की अनुमतियां देने के बदले अधिकारी द्वारा उसका यौन शोषण भी किया गया।
| प्रमुख बिंदु | विवरण |
| मुख्य आरोपी अधिकारी | एम. सोमशेखर (DIG, Prisons North Range) |
| कैदी का नाम | शंकर ए. (उम्रकैदी) |
| रिहाई की तिथि | 13 नवंबर 2018 |
| रिहाई का आधार | फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश (तारीख 2 नवं 2018) |
| जांच स्थिति | 4 अक्टूबर को गिरफ्तारी, 9 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत |
8 साल बाद ऐसे खुला राज
जेल महानिदेशक को मिली एक अनाम याचिका के बाद आंतरिक जांच शुरू हुई। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय से जब सत्यापन कराया गया, तो पुष्टि हुई कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश कभी जारी ही नहीं किया था। इसके बाद बेंगलुरु सेंट्रल जेल के कार्यवाहक अधीक्षक की शिकायत पर परप्पना अग्रहारा थाने में IPC की धारा 420, 465, 466, 468, 471 और 472 के तहत मामला दर्ज किया गया। कैदी को पुन: गिरफ्तार कर लिया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQ)
DIG एम. सोमशेखर को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
उन्हें 2018 में बेंगलुरु सेंट्रल जेल का चीफ सुपरिंटेंडेंट रहते हुए एक उम्रकैदी (शंकर ए.) को फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश पत्र प्रस्तुत करके गैर-कानूनी ढंग से रिहा कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
यह फर्जीवाड़ा कितने साल बाद उजागर हुआ?
यह मामला लगभग 8 साल बाद (2026 में) उजागर हुआ, जब विभाग में आई एक गुप्त शिकायत के बाद सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार से पत्रों का मिलान कराया गया।
इसमें कौन–कौन सी धाराएं लगाई गई हैं?
पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की जालसाजी (Forgery), धोखाधड़ी (Cheating), और फर्जी न्यायिक दस्तावेज तैयार करने से जुड़ी धाराएं (420, 465, 466, 468, 471, 472) दर्ज की हैं।
Disclaimer
यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स एवं पुलिसRemand एप्लीकेशन के आधार पर तैयार किया गया है। सभी आरोप जांच के अधीन हैं और अदालत में न्यायिक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही अंतिम निर्णय मान्य होगा।
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