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शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1,045 अंक टूटा, निफ्टी 52-सप्ताह के निचले स्तर पर; जानें गिरावट के 4 बड़े कारण

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

मुंबई।

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को निवेशकों की ओर से चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा मौद्रिक नीति में सख्ती के संकेतों के चलते बाजार की धारणा पूरी तरह से चरमरा गई। कारोबार के अंत में BSE Sensex 1,045.00 अंक (1.44%) गिरकर 71,593.24 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, NSE Nifty 50 भी 371.25 अंक (1.64%) की बड़ी गिरावट के साथ 22,231.80 पर आ गया।

सत्र के दौरान सेंसेक्स करीब 71,328 के निचले स्तर तक फिसला, जबकि निफ्टी ने 22,180 के आसपास पहुंचकर अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर (52-week low) को छुआ।

 

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बाजार के मुख्य आंकड़े एक नजर में

सूचकांक (Index)अंतिम बंद स्तरगिरावट (अंक)प्रतिशत बदलावसत्र का निचला स्तर (Intraday Low)
BSE Sensex71,593.24-1,045.00-1.44%71,328.00
NSE Nifty 5022,231.80-371.25-1.64%22,180.00 (52-Wk Low)

 

शेयर बाजार में गिरावट के 4 प्रमुख कारण

कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे चालू खाते का घाटा (CAD) और मुद्रास्फीति (Inflation) पर दबाव बढ़ेगा।

RBI की ‘Calibrated Tightening’ और रेपो रेट में बढ़ोतरी

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में 25 बीपीएस (Basis Points) की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% करने और नीतिगत रुख को ‘Calibrated Tightening’ में बदलने से बाजार में भय का माहौल बना। ब्याज दरें बढ़ने से बैंकिंग, ऑटोमोबाइल और रियल्टी जैसे रेट-सेंसिटिव सेक्टर सीधे प्रभावित हुए हैं।

FIIs की ओर से लगातार भारी बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी बाजार से अपनी पूंजी निकालना जारी रखा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और मजबूत डॉलर के चलते वैश्विक निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी कर बाजार को सहारा देने का प्रयास किया, लेकिन FII्स के भारी दबाव को रोक पाना मुश्किल रहा।

सेक्टर–वाइज चौतरफा बिकवाली

गुरुवार के कारोबार में रियल्टी, मेटल, ऑयल एंड गैस, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स में 2% से 3% तक की बड़ी गिरावट देखी गई। हालांकि, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और चुनिंदा प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में थोड़ी मजबूती रही, जो सूचकांकों को और अधिक नीचे जाने से बचाने में असफल रहे।

 

निवेशकों के लिए आगे की राह: अब क्या करें?

  • घबराकर पैनिक सेलिंग से बचें: बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अल्पकालिक उतार-चढ़ाव में घबराकर पोर्टफोलियो बेचना नुकसानदेह हो सकता है।
  • SIP निवेश जारी रखें: लंबे समय के निवेशकों के लिए 52-सप्ताह के निचले स्तर के आसपास अनुशासित तरीके से SIP जारी रखना सही रणनीति है।
  • क्वालिटी स्टॉक्स पर नजर रखें: फंडामेंटली मजबूत और कम कर्ज वाली दिग्गज (Large-cap) कंपनियों में वैल्यूएशन अब ज्यादा आकर्षक हो रहे हैं।
  • आगामी घटनाओं पर नजर: आने वाले सत्रों में कच्चे तेल के भाव, रुपये की चाल, FII डेटा और कंपनियों के Q2 वित्तीय परिणामों से बाजार की दिशा तय होगी।

 

उपयोगी संदर्भ लिंक्स (Relevant Links)

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: आज शेयर बाजार क्यों गिरा?

उत्तर: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, RBI द्वारा रेपो रेट में 25 bps की बढ़ोतरी, FIIs की लगातार बिकवाली और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण शेयर बाजार में गिरावट आई।

Q2: आज सेंसेक्स और निफ्टी कितने अंक गिरकर बंद हुए?

उत्तर: BSE सेंसेक्स 1,045 अंक टूटकर 71,593.24 पर और NSE निफ्टी 371 अंक फिसलकर 22,231.80 के स्तर पर बंद हुआ।

Q3: क्या इस गिरावट में शेयर बाजार में नया निवेश करना सही है?

उत्तर: लंबी अवधि के निवेशक SIP के माध्यम से या मजबूत बैलेंस शीट वाली क्वालिटी कंपनियों में किस्तों में निवेश (Value Buying) शुरू कर सकते हैं।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख केवल शैक्षणिक एवं सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार (SEBI Registered Advisor) से परामर्श अवश्य करें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।