नई दिल्ली।
बिहार समेत देश के विभिन्न राज्यों में मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रही खींचतान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा लागू किए गए नए Form 6 को न तो औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई है और न ही इसे खारिज किया है।
अदालत ने यह साफ तौर पर रेखांकित किया कि नए फॉर्म की संवैधानिक और कानूनी वैधता पर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है।
पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं।
क्या है विवाद का मुख्य कारण?
इस पूरे विवाद की जड़ में Form 6 में चुनाव आयोग द्वारा जोड़ा गया नया ‘अतिरिक्त घोषणा-पत्र’ (Extra Declaration) है।
पहली बार मतदाता बनने के लिए आवेदन करने वाले नागरिकों से अब यह अतिरिक्त जानकारी माँगी जा रही है कि:
- वे स्वयं, या
- उनके माता-पिता, या
- उनके दादा-दादी
पिछली SIR (Special Intensive Revision) की मतदाता सूची में दर्ज थे या नहीं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि चुनाव आयोग ने मुख्य Form 6 में इस प्रकार की अतिरिक्त शर्तें जोड़ने के लिए तय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया है।
चुनाव आयोग के दावे पर सुप्रीम कोर्ट की दोटूक
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर यह धारणा बनाने की कोशिश की थी कि नए Form 6 को सुप्रीम कोर्ट की मंज़ूरी मिल चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए निम्नलिखित बातें साफ कीं:
- मई 2026 के फैसले का संदर्भ: जब अदालत ने मई 2026 में बिहार SIR से जुड़े मामले में अपना निर्णय दिया था, तब यह विवादित Form 6 अस्तित्व में ही नहीं था। इसलिए उस फैसले को नए फॉर्म की मंजूरी से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।
- 5 अक्टूबर की टिप्पणी का भ्रम: 5 अक्टूबर 2026 को हुई पिछली सुनवाई में कोर्ट ने आयोग से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा था, जिसे कुछ रिपोर्टों में ‘अस्वीकृति’ मान लिया गया था। कोर्ट ने कहा कि न तो इसे अस्वीकार किया गया है और न ही स्वीकार।
वर्तमान स्थिति और अगली सुनवाई
विवादित Form 6 और SIR से जुड़े कानूनी सवालों पर अगली बड़ी सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित है। उस दिन अदालत फॉर्म में जुड़ी शर्तों, इसकी प्रक्रियात्मक वैधता और नागरिकों के अधिकारों से जुड़े पहलुओं की व्यापक जांच करेगी।
| मुख्य बिंदु | अदालत का वर्तमान रुख |
| मंजूरी की स्थिति | न तो स्वीकृत, न ही अस्वीकृत |
| अंतिम निर्णय | विचारधीन (न्यायिक समीक्षा जारी) |
| मई 2026 फैसला | नए Form 6 पर लागू नहीं होता |
| अगली सुनवाई तिथि | 27 अक्टूबर 2026 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: Form 6 किस काम आता है?
उत्तर: भारत में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों द्वारा नए मतदाता (Voter ID) के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए Form 6 का उपयोग किया जाता है।
Q2: सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर 2026 को क्या कहा?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने SIR प्रक्रिया के तहत पेश किए गए नए Form 6 को न तो कोई मंजूरी दी है और न ही इसे खारिज किया है।
Q3: इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
उत्तर: इस मामले से जुड़े सभी कानूनी और प्रक्रियात्मक सवालों पर अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह समाचार लेख जनहित में केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए प्रकाशित किया गया है। इसमें शामिल तथ्य 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान दिए गए बयानों पर आधारित हैं। कानूनी या आधिकारिक जानकारी के लिए कृपया चुनाव आयोग अथवा भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आधिकारिक पोर्टल का अवलोकन करें।
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