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राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक की SIR याचिका पर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने दर्ज कीं 14 कमियां: जानें पूरा मामला

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

नई दिल्ली।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के शीर्ष नेताओं की ओर से भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा चलाए जा रहे Special Intensive Revision (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। हालांकि, याचिका को सुनवाई (Listing) के लिए सूचीबद्ध किए जाने से पहले ही सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने इसमें 14 प्रक्रियात्मक, तकनीकी और दस्तावेजी कमियां पाई हैं।

यह याचिका देश में मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ दायर की गई है। कोर्ट के नियमों के तहत, इन खामियों को दूर करने के बाद ही मामला मुख्य पीठ के समक्ष लाया जा सकेगा।

 

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सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की 14 प्रमुख खामियां

  1. लिस्टिंग प्रोफॉर्मा त्रुटि: लिस्टिंग प्रोफॉर्मा में प्रतिवादी के नाम को सही करने का निर्देश।
  2. पेज नंबर 9 पर गलती: याचिका के पृष्ठ 9 पर दर्ज प्रतिवादियों का विवरण सही करने की आवश्यकता।
  3. निजी पक्षों की स्थिति: कुछ निजी व्यक्तियों/संस्थाओं को पक्षकार (प्रतिवादी) बनाए जाने के कारणों का स्पष्ट न होना।
  4. पूर्व मामलों का विवरण गायब: पूर्व में दायर संबंधित याचिकाओं या मामलों का उल्लेख करने वाला अनिवार्य पैराग्राफ नहीं जोड़ा गया।
  5. प्रार्थना (Prayers) में विसंगति: याचिका के अंतिम प्रार्थना पत्र में प्रतिवादी संख्या को सही करने की जरूरत।
  6. निर्णय की प्रति अनुपलब्ध: 24 जून 2025 के संबंधित आदेश/निर्णय की सत्यापित प्रति संलग्न न होना।
  7. Annexure P2 में तारीख का अंतर: रिकॉर्ड और संलग्नक Annexure P2 की तारीखों में असमानता।
  8. अस्पष्ट पृष्ठ: कुछ पन्नों की स्पष्ट एवं रंगीन प्रतियां जमा करने के निर्देश।
  9. Annexure P5 में केस नंबर का अंतर: Annexure P5 में लिखे केस नंबर की विसंगति दूर करने की मांग।
  10. डिजिटल साक्ष्य गायब: Annexure P6 से संबंधित पेन ड्राइव/डिजिटल साक्ष्य जमा न कराया जाना।
  11. वकालतनामा नहीं होना: याचिकाकर्ता संख्या 3 से 11 तक (कुल 9 नेताओं) के कानूनी वकालतनामा जमा नहीं थे।
  12. पहचान पत्र अस्पष्ट: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की प्रति का स्पष्ट/पठनीय न होना।
  13. कोर्ट फीस में कमी: निर्धारित कोर्ट फीस में कुल 220 रुपये का भुगतान कम पाया गया।
  14. फॉर्मैटिंग त्रुटियां: धुंधले अक्षर, छोटे फॉन्ट साइज, छूटे हुए पन्ने, क्षेत्रीय भाषा के पेज और पेज नंबरिंग से जुड़ी त्रुटियां।

 

क्या याचिका खारिज हो गई है?

बिल्कुल नहीं। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा आपत्तियां दर्ज किया जाना (Defect Notification) किसी भी सिविल या रिट याचिका की दाखिल प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने याचिका के दावों या कानूनी पहलुओं को खारिज कर दिया है।

वकीलों द्वारा इन आपत्तियों को सुधारकर याचिका दोबारा (Refile) जमा की जाएगी, जिसके बाद रजिस्ट्री इसे स्वीकार कर औपचारिक रूप से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी।

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याचिका में विपक्षी नेताओं की मुख्य मांगें

  • SIR से जुड़े रिकॉर्ड की मांग: 24 जून 2025 के निर्णय और आयोग की फाइल नोटिंग्स सार्वजनिक की जाएं।
  • स्वतंत्र ऑडिट/जांच: मतदाता सूची में हुए संशोधनों और हटाए गए नामों की जांच के लिए स्वतंत्र जांच समिति का गठन हो।
  • अंतरिम रोक: SIR प्रक्रिया के संचालन पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगाई जाए।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट में क्या याचिका दायर की है?

विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और फर्जी नामों की शिकायत दर्ज कराते हुए इसकी जांच और रोक की मांग की है।

क्या 14 कमियों के कारण याचिका रद्द मानी जाएगी?

नहीं, यह सिर्फ प्रशासनिक और दस्तावेजी कमियां हैं जिन्हें ठीक करके दोबारा जमा किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कब होगी?

रजिस्ट्री द्वारा दर्ज 14 कमियों को दूर कर याचिका पुनः जमा किए जाने के बाद ही केस की सुनवाई की तारीख तय होगी।

 

अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों और कानूनी प्रक्रियाओं पर आधारित एक विश्लेषणात्मक समाचार रिपोर्ट है। यह किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह या अंतिम न्यायिक राय नहीं है। मामले में न्यायालय का निर्णय अंतिम होगा।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।