लोड हो रहा है...

रूस-यूक्रेन युद्ध विराम विवाद: जेलेंस्की का 60 दिवसीय प्रस्ताव और क्रेमलिन का रुख

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

मॉस्को।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की द्वारा प्रस्तावित 60 दिनों के पूर्ण युद्धविराम को रूस (क्रेमलिन) ने आधिकारिक तौर पर खारिज कर दिया है। जेलेंस्की ने अमेरिकी मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में यह स्पष्ट किया था कि यदि रूस दो महीने के लिए सैन्य कार्रवाइयां रोकता है, तो यूक्रेन इस समयावधि में टले हुए राष्ट्रपति चुनाव आयोजित करने के लिए तैयार है।

यूक्रेन में जारी मार्शल लॉ और युद्ध की परिस्थितियों के कारण लंबे समय से चुनाव टले हुए हैं, जिसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक चर्चाएं जारी थीं।

 

- Advertisement -

क्रेमलिन का रुख: अस्थायी विराम बनाम दीर्घकालिक शांति

क्रेमलिन के आधिकारिक प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि रूस केवल कुछ हफ्तों या महीनों के लिए अस्थाई रूप से लड़ाई रोकने के पक्ष में नहीं है।

  • अस्थायी युद्धविराम पर आपत्ति: रूस का तर्क है कि 60 दिनों का विराम यूक्रेनी सेना को पुनर्गठित होने और नए हथियार व सैन्य आपूर्ति जुटाने का अवसर प्रदान करेगा।
  • स्थायी समझौते की मांग: रूस का मानना है कि किसी भी विराम का आधार केवल अल्पकालिक समझौता नहीं, बल्कि व्यापक और दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी होनी चाहिए।
  • एक दिवसीय विराम का सुझाव: हालांकि, रूसी पक्ष ने यह संकेत दिया है कि यदि यूक्रेन चुनाव आयोजित करता है, तो केवल मतदान के दिन सीमित अवधि (1 दिन) के लिए हमलों को रोकने पर विचार किया जा सकता है।

 

यूक्रेन में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर बढ़ता विवाद

पक्षमुख्य मांग / स्थिति
यूक्रेन (कीव)सुरक्षित माहौल, 60-दिवसीय युद्धविराम और नागरिकों के लिए सुरक्षा गारंटी के बिना चुनाव संभव नहीं।
रूस (मॉस्को)चुनाव न कराने का मुद्दा उठाकर यूक्रेनी नेतृत्व की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाता रहा है।

यूक्रेन के संविधान और मार्शल लॉ के तहत युद्धकाल में चुनाव कराना बेहद कठिन है। जेलेंस्की सरकार का कहना है कि 60 दिनों का युद्धविराम ही मतदाताओं और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार कर सकता है।

- Advertisement -

 

शांति वार्ता और भविष्य की चुनौतियां

रूस द्वारा इस प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद निकट भविष्य में यूक्रेन में चुनाव आयोजित होने की संभावनाएं क्षीण नजर आ रही हैं।

  1. सुरक्षा एवं कानूनी बाधाएं: युद्ध की स्थिति में लाखों विस्थापित नागरिकों और अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों के लिए मतदान व्यवस्था करना यूक्रेन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
  2. कूटनीतिक गतिरोध: रूस का ध्यान अस्थायी युद्धविराम के बजाय व्यापक राजनीतिक और भौगोलिक शर्तों पर टिका है, जिसके कारण मध्यस्थता प्रक्रिया जटिल बनी हुई है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

जेलेंस्की ने 60 दिनों के युद्धविराम का प्रस्ताव क्यों दिया था?

जेलेंस्की ने 60 दिनों के युद्धविराम का प्रस्ताव इसलिए दिया था ताकि देश में जारी मार्शल लॉ के बावजूद राष्ट्रपति चुनाव कराने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल माहौल तैयार किया जा सके।

रूस ने 60-दिवसीय युद्धविराम को क्यों खारिज किया?

रूस का मानना है कि अल्पकालिक युद्धविराम से संघर्ष का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा और इससे यूक्रेनी सेना को फिर से संगठित होने का समय मिल जाएगा। रूस व्यापक और दीर्घकालिक शांति समझौते को प्राथमिकता देता है।

क्या रूस चुनाव के दिन हमला रोकने के लिए तैयार है?

हाँ, रूसी पक्ष ने संकेत दिया है कि यदि यूक्रेन चुनाव आयोजित करता है, तो मतदान के दिन सीमित अवधि के लिए हमलों को स्थगित करने पर विचार किया जा सकता है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख वर्तमान कूटनीतिक घटनाओं और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों पर आधारित एक विश्लेषणात्मक विवरण है।

 

ऐतिहासिक जानकारियों के लिए संदर्भ Matribhumi Samachar से प्राप्त किए जा सकते हैं।

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।