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UPI MDR Rules Delay: दिवाली के बाद लागू होगा बड़े मर्चेंट भुगतानों पर नया शुल्क, जानें ग्राहकों पर क्या होगा असर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

मुंबई।

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए बड़े मर्चेंट लेनदेन करने वाले कारोबारियों और ग्राहकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बड़ा फैसला लेते हुए ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI भुगतानों पर प्रस्तावित शुल्क (Merchant Discount Rate – MDR) व्यवस्था के क्रियान्वयन को फिलहाल टाल दिया है।

पहले इस व्यवस्था को 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना था, लेकिन देश भर में आगामी त्योहारों की वजह से बढ़ते डिजिटल कारोबार और परिचालन दबाव को देखते हुए अब इसे दिवाली के बाद लागू करने का निर्णय लिया गया है।

 

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क्या है प्रस्तावित UPI MDR शुल्क व्यवस्था?

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, ₹2,000 से अधिक राशि वाले चुनिंदा पात्र मर्चेंट (P2M) भुगतानों पर 0.4% का Merchant Discount Rate (MDR) लगाने का प्रावधान किया गया है।

  • अधिकतम शुल्क सीमा: यदि कोई मर्चेंट लेनदेन ₹75,000 या उससे अधिक का होता है, तो उस पर MDR की अधिकतम सीमा (Capping) ₹300 तय की गई है।
  • उदाहरण: यदि किसी पात्र मर्चेंट को UPI के माध्यम से ₹50,000 का भुगतान प्राप्त होता है, तो 0.4% की दर से उस पर ₹200 का MDR लागू होगा।

 

किन भुगतानों पर शुल्क लगेगा और कौन रहेंगे बाहर?

प्रस्तावित नियम को लेकर आम यूजर्स के मन में कई तरह के सवाल हैं। NPCI के अनुसार यह शुल्क सभी UPI लेनदेन पर लागू नहीं होगा:

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  • Person-to-Person (P2P) ट्रांसफर पूरी तरह मुक्त: एक आम नागरिक द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति या दोस्त को भेजे जाने वाले पैसों पर कोई शुल्क लागू नहीं होगा।
  • Small Merchant Exemption: छोटे व्यापारियों और ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट भुगतानों पर 0.0% MDR रहेगा, यानी ये पूरी तरह निशुल्क रहेंगे।
  • पात्र मर्चेंट भुगतान: यह शुल्क केवल ₹2,000 से अधिक राशि के विशेष/बड़े मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर ही लागू होगा।

 

क्या आम ग्राहकों को देना होगा अतिरिक्त शुल्क?

नहीं, सामान्य UPI उपयोगकर्ताओं पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

MDR मर्चेंट (व्यापारी) के पक्ष की लागत होती है। नियमों के तहत व्यापारी इस MDR शुल्क को ग्राहक से अलग से नहीं वसूल सकते। इसलिए, आम ग्राहक पहले की तरह ही बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के UPI से भुगतान जारी रख सकते हैं।

 

फैसला क्यों टाला गया?

दिवाली और धनतेरस के दौरान देश में खुदरा बिक्री और ऑनलाइन भुगतान का आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाता है। व्यापारिक संगठनों और भुगतान सेवा प्रदाताओं ने चिंता जताई थी कि ऐसे व्यस्त सीजन में नई शुल्क प्रणाली लागू करने से तकनीकी, बैंकिंग और परिचालन संबंधी रुकावटें आ सकती हैं।

व्यापारियों और बैंकों को तकनीकी बदलावों के लिए पर्याप्त समय देने और त्योहारी खरीदारी को सुगम बनाए रखने के लिए NPCI ने इस व्यवस्था को दिवाली के बाद तक स्थगित कर दिया है।

 

दिवाली के बाद कब लागू होगी नई तारीख?

वर्ष 2026 में दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी। ऐसे में नई व्यवस्था नवंबर माह में दिवाली पर्व समाप्त होने के बाद लागू किए जाने की संभावना है। हालांकि, नई तारीख और विस्तृत दिशानिर्देशों की पुष्टि NPCI की आने वाली आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही होगी।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. क्या 15 अक्टूबर 2026 से UPI से पैसे भेजने पर चार्ज लगेगा?

उत्तर: नहीं। 15 अक्टूबर से लागू होने वाली शुल्क व्यवस्था को दिवाली के बाद तक के लिए टाल दिया गया है।

Q2. क्या गूगल पे या फोनपे से दोस्त को पैसे भेजने पर शुल्क लगेगा?

उत्तर: नहीं। Person-to-Person (P2P) लेनदेन पूरी तरह से निशुल्क रहेगा।

Q3. क्या दुकानदार मुझसे UPI पेमेंट पर अलग से ₹200 या 0.4% चार्ज ले सकता है?

उत्तर: नहीं। MDR शुल्क मर्चेंट की लागत है और इसे ग्राहक से वसूलने की अनुमति नहीं है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध आधिकारिक जानकारियों एवं प्रेस नोट के आधार पर तैयार किया गया है। नई शुल्क व्यवस्था की सटीक तारीख एवं विस्तृत नियम NPCI (National Payments Corporation of India) की अंतिम आधिकारिक अधिसूचना के अधीन हैं।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।