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मद्रास हाईकोर्ट की तमिलनाडु पुलिस को कड़ी फटकार: “किसी समुदाय को बेवजह बदनाम न करें, मस्जिद के नाम पर RSS पथ संचलन रोकना गलत”

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

चेन्नई।

तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विजयादशमी पथ संचलन की अनुमति से जुड़े मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस और प्रशासन को सख्त लहजे में हिदायत दी है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की एकल पीठ ने पुलिस की उन दलीलों पर गंभीर सवाल उठाए, जिनमें सुरक्षा और मुस्लिम बहुल क्षेत्रों का हवाला देकर जुलूस रोकने की कोशिश की गई थी।

अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि कानून-व्यवस्था के नाम पर किसी भी समुदाय के प्रति नकारात्मक पूर्वाग्रह बनाना अनुचित है।

 

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मद्रास हाईकोर्ट की मुख्य मौखिक टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रशासनिक दलीलों की धज्जियां उड़ाते हुए कई तीखे सवाल दागे:

  • समुदाय के नाम पर गलत धारणा न बनाएं: अदालत ने पुलिस से पूछा कि क्या वास्तव में किसी मुस्लिम नागरिक ने इस संचलन पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है? बिना शिकायत किसी पूरे समुदाय को बदनाम करना गलत है।
  • मस्जिद या ईदगाह आधार नहीं हो सकती: किसी प्रस्तावित मार्ग पर मस्जिद, ईदगाह या अन्य धार्मिक स्थल की मौजूदगी मात्र से नागरिकों के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों को नहीं छीना जा सकता।
  • कश्मीर की तुलना और पुरानी घटनाओं का संदर्भ खारिज: जस्टिस लक्ष्मीनारायणन ने टिप्पणी की कि जब जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में संचलन निकल सकता है, तो तमिलनाडु में बार-बार अड़चन क्यों खड़ी की जाती है? साथ ही, प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़ी पुरानी घटनाओं को वर्तमान मामले से जोड़ना तर्कहीन है।

“नागरिकों के मूलभूत अधिकार पुलिस की इच्छा, आशंकाओं या मनमर्जी पर निर्भर नहीं रह सकते। सुरक्षा का आकलन ठोस और वास्तविक होना चाहिए, न कि काल्पनिक आधारों पर।“ — जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन (मद्रास हाईकोर्ट)

 

128 स्थानों पर मांगा गया था पथ संचलन का अधिकार

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RSS की ओर से राज्य भर में विजयादशमी स्थापना दिवस के अवसर पर 128 स्थानों पर पथ संचलन आयोजित करने की अनुमति मांगी गई थी।

विवरणसंख्या / स्थिति
कुल प्रस्तावित स्थान128 स्थान
पुलिस द्वारा स्वीकृत स्थान58 स्थान
आपत्ति वाले स्थान70 स्थान (सुरक्षा व कानून-व्यवस्था का हवाला)
प्रस्तावित नई तिथियांउत्तर तमिलनाडु: 25 अक्टूबर | दक्षिण तमिलनाडु: 1 नवंबर

 

RSS को भी सौंपना होगा स्पष्ट हलफनामा

यद्यपि हाईकोर्ट का रुख पुलिस की कार्यशैली के खिलाफ कड़ा रहा, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना बेहद आवश्यक है। इसके लिए अदालत ने आयोजकों (RSS) को निम्नलिखित शर्तें पूरी करने के निर्देश दिए:

  1. प्रत्येक स्थान के लिए विस्तृत मार्ग (Route Map) जमा करना।
  2. संचलन में भाग लेने वाले स्वयंसेवकों की अनुमानित संख्या स्पष्ट करना।
  3. स्थानीय आयोजकों और संयोजकों के विवरण वाला हलफनामा प्रस्तुत करना।

राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) को पुलिस महानिदेशक (DGP) से परामर्श कर शांतिपूर्ण रास्ता निकालने और अदालत को सूचित करने का निर्देश दिया गया है।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस की किस दलील पर आपत्ति जताई?

उत्तर: हाईकोर्ट ने पुलिस की उस दलील पर कड़ी नाराजगी जताई जिसमें मुस्लिम समुदाय, मस्जिदों की मौजूदगी और PFI की पुरानी घटनाओं का हवाला देकर पथ संचलन रोकने की कोशिश की गई थी।

प्रश्न 2: RSS ने तमिलनाडु में कितने स्थानों पर पथ संचलन की अनुमति मांगी है?

उत्तर: RSS ने राज्य भर में कुल 128 स्थानों पर विजयादशमी पथ संचलन की अनुमति मांगी है।

प्रश्न 3: क्या कोर्ट ने RSS को बिना शर्त अनुमति दे दी है?

उत्तर: नहीं, कोर्ट ने RSS से मार्ग, प्रतिभागियों की संख्या और आयोजकों की जानकारी के साथ हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer)

यह समाचार लेख उपलब्ध अदालती कार्यवाहियों, मौखिक टिप्पणियों एवं सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित एक सूचनात्मक विश्लेषण है। कानूनी मामलों में अंतिम निर्णय अदालत के लिखित आदेशों एवं प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अधीन होते हैं।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।