लोड हो रहा है...

प्रयागराज का बदलता स्वरूप: माफिया के गढ़ कसारी-मसारी को नई पहचान, अब ‘श्रीकृष्णपुरी’ के नाम से होगा आधुनिक विकास

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

प्रयागराज|

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संगम नगरी प्रयागराज के विकास और सौंदर्यीकरण को लेकर एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। प्रयागराज के कसारी-मसारी क्षेत्र को अब एक नई सांस्कृतिक और आधुनिक पहचान मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंच से घोषणा की है कि कसारी-मसारी का नाम बदलकर अब ‘श्रीकृष्णपुरी’ रखा जाएगा।

यह घोषणा केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस पूरे इलाके में आधुनिक बुनियादी ढांचा, आवासीय सुविधाएं और वाणिज्यिक केंद्र (कमर्शियल हब) विकसित करने की एक विस्तृत कार्ययोजना का हिस्सा है।

 

- Advertisement -

पद्मलोक आवासीय परियोजना: 602 परिवारों को मिलेगा अपना आशियाना

प्रयागराज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कसारी-मसारी क्षेत्र में बहुप्रतीक्षित पद्मलोक आवासीय परियोजना का भूमि पूजन और शिलान्यास किया।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं:

  • विशाल क्षेत्रफल: यह बहुमंजिला आवासीय परिसर लगभग 9,811 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैला होगा।
  • 14 मंजिला इमारत और 602 फ्लैट: इस परियोजना के तहत 14 मंजिला इमारत का निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए 602 टू–बीएचके (2-BHK) फ्लैट्स तैयार किए जाएंगे।
  • पर्यावरण–अनुकूल और अत्याधुनिक सुविधाएं: परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग (वर्षा जल संचयन), सौर ऊर्जा (सोलर पैनल), कम्युनिटी हॉल, पार्क, खेल सुविधाएं, आधुनिक जिम और व्यावसायिक क्षेत्र शामिल होंगे।
  • कार्यकारी एजेंसी: इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) द्वारा तीव्र गति से कराया जा रहा है।

 

माफियागिरी पर प्रहार: खौफ की जमीन पर कानून का राज और गरीबों का आवास

- Advertisement -

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की ‘जीरो टॉलरेंस‘ नीति को दोहराया। उन्होंने कहा कि जिन जमीनों पर कभी माफियाओं और अपराधियों का कब्जा हुआ करता था, आज उन जमीनों को सरकारी तंत्र द्वारा कब्जा मुक्त कराकर गरीबों और जरूरतमंद परिवारों के सिर की छत में बदला जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज अब भय और खौफ के दौर से पूरी तरह बाहर निकल चुका है। शहर में सुरक्षा, सुशासन और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। सरकार का संदेश साफ है कि प्रदेश में अपराध के लिए कोई जगह नहीं है।

 

झलवा आईटीआई का नाम ‘महाराजा बिजली पासी‘ के नाम पर

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को सम्मान देने की कड़ी में मुख्यमंत्री ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। प्रयागराज के झलवा क्षेत्र में निर्माणाधीन राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) का नाम महान ऐतिहासिक प्रतीक ‘महाराजा बिजली पासी‘ के नाम पर रखा जाएगा। इस फैसले को स्थानीय विरासत और सामाजिक गौरव को संजोने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।

 

श्रीकृष्णपुरी: एक पूर्ण टाउनशिप के रूप में उदय

कसारी-मसारी का नाम श्रीकृष्णपुरी किए जाने से क्षेत्र के निवासियों में नया उत्साह है। इस इलाके को अब आधुनिक मॉडल टाउनशिप के रूप में तैयार किया जा रहा है। चौड़ी सड़कें, निर्बाध बिजली-पानी आपूर्ति, बाजार, खेल के मैदान और सामुदायिक केंद्र बनने से इस इलाके की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी।

 

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. कसारी–मसारी क्षेत्र का नया नाम क्या रखा गया है?

उत्तर: प्रयागराज के कसारी-मसारी क्षेत्र का नाम बदलकर ‘श्रीकृष्णपुरी‘ रखा गया है।

Q2. पद्मलोक आवासीय परियोजना के तहत कितने फ्लैट्स बनाए जा रहे हैं?

उत्तर: इस योजना के तहत 14 मंजिला इमारत में 602 टू–बीएचके (2-BHK) फ्लैट्स बनाए जा रहे हैं।

Q3. पद्मलोक परियोजना का निर्माण कौन सी संस्था कर रही है?

उत्तर: इस परियोजना का निर्माण प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) द्वारा किया जा रहा है।

Q4. झलवा की निर्माणाधीन ITI का नाम किसके नाम पर रखा जाएगा?

उत्तर: झलवा की ITI का नाम महाराजा बिजली पासी के नाम पर रखा जाएगा।

 

Disclaimer / अस्वीकरण

यह समाचार लेख उपलब्ध सूचनाओं और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित है। मातृभूमि समाचार (Matribhumi Samachar) इस जानकारी की सटीकता और सामयिकता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

उपयोगी लिंक्स

मातृभूमि समाचार के मुख्य पृष्ठ पर जाएं: Matribhumi Samachar Homepage

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।