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अर्जुन और दुर्योधन ने सोनी सब के ‘हस्तिनापुर के वीर’ में माँ दुर्गा और महिषासुर के प्रतिष्ठित युद्ध को किया जीवंत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, अक्टूबर, 2026: सोनी सब का ‘हस्तिनापुर के वीर’ पांडवों और कौरवों के बचपन की कालजयी कहानियों को जीवंत करता है, जिसमें साहस, कर्तव्य और बुराई पर अच्छाई की जीत जैसे मूल्यों को दर्शाया जाता है। शो में एक विशेष नृत्य प्रस्तुति के दौरान अर्जुन (उर्वा सावलिया) माँ दुर्गा का रूप धारण करते हैं, जबकि दुर्योधन (आयुध भानुशाली) महिषासुर की भूमिका में नजर आते हैं। दोनों मिलकर देवी और दैत्य के बीच होने वाले उस प्रतिष्ठित युद्ध का पुनर्सृजन करते हैं, जो भारतीय पौराणिक कथाओं के सबसे प्रसिद्ध प्रसंगों में से एक है।

इस प्रस्तुति में नृत्य, संगीत और दमदार भाव-भंगिमाओं का संगम देखने को मिलेगा, जो इस पौराणिक युद्ध की तीव्रता और भव्यता को जीवंत करता है। माँ दुर्गा के रूप में सजे उर्वा इस प्रस्तुति के लिए एक अलग अंदाज में नजर आते हैं, जहाँ वे अपने अभिनय में सौम्यता और शक्ति का सुंदर संतुलन लेकर आते हैं, वहीं दुर्योधन के रूप में आयुध भानुशाली महिषासुर की अपार शक्ति और प्रभावशाली व्यक्तित्व को साकार करते हैं। यह प्रस्तुति उर्वा के लिए भी एक नया अनुभव रही, जिन्होंने अपने नृत्य के स्टेप्स और भावों को पूरी तरह निखारने के लिए कई हफ्तों तक हर दिन अभ्यास किया।

अर्जुन का किरदार निभा रहे उर्वा सावलिया ने साझा किया, “जब मुझे पता चला कि इस विशेष प्रस्तुति में मैं माँ दुर्गा का किरदार निभाने वाला हूँ, तो कुछ बिल्कुल नया करने को लेकर मैं बहुत उत्साहित था। माँ दुर्गा के रूप में तैयार होना और उस किरदार को निभाना मेरे लिए एक अनूठा अनुभव रहा। इस प्रस्तुति की तैयारी के लिए मुझे कई हफ्तों तक अभ्यास करना पड़ा, ताकि मैं अपने नृत्य के स्टेप्स और भाव-भंगिमाओं को पूरी तरह निखार सकूँ और इतने प्रतिष्ठित किरदार के साथ न्याय कर सकूँ। यह सफर चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ बेहद आनंददायक भी रहा, क्योंकि इसने मुझे अपने एक अलग पक्ष को जानने और दिखाने का अवसर दिया। इतने खास प्रस्तुति का हिस्सा बनना मेरे लिए एक शानदार अनुभव रहा।”

सोनी सब के ‘हस्तिनापुर के वीर’ देखें, हर सोमवार से शनिवार रात 9:00 बजे, सिर्फ सोनी सब पर।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।