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डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रस्तावित 100% टैरिफ और प्रतिबंधों पर लगाई रोक: भारत और चीन को मिली बड़ी राहत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
6 Min Read

वाशिंगटन।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम फैसला लेते हुए रूस से जुड़े नए कड़े प्रतिबंधों, व्यापारिक पाबंदियों और भारी प्रस्तावित टैरिफ को फिलहाल लागू होने से रोक दिया है। 16 अक्टूबर 2026 को जारी किए गए एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) के माध्यम से अमेरिकी प्रशासन ने इन प्रतिबंधों को निलंबित कर दिया। ट्रंप प्रशासन ने इस फैसले के पीछे अमेरिकी “राष्ट्रीय हित” (National Interest) का हवाला दिया है।

इस कदम से रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करने वाले देशों, विशेष रूप से भारत और चीन, को तत्काल बड़ी राहत मिली है।

 

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प्रस्तावित टैरिफ प्रावधान: 100% से 500% तक का शुल्क

अमेरिकी कांग्रेस द्वारा वर्ष 2026 में पारित ‘लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट’ (Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026) के तहत रूस और ईरान पर बेहद कड़े आर्थिक दबाव बनाने का खाका तैयार किया गया था:

  1. 100% अतिरिक्त आयात शुल्क: रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले शीर्ष 5 आयातक देशों (जिनमें भारत और चीन शामिल हैं) के अमेरिकी निर्यात पर 100 प्रतिशत तक का भारी जुर्माना/टैरिफ लगाने की व्यवस्था थी।
  2. 500% तक सीमा शुल्क: रूस से सीधे अमेरिका आने वाले ऊर्जा उत्पादों व अन्य सामानों पर 500 प्रतिशत तक सीमा शुल्क लगाने का नियम था।
  3. तृतीय–पक्ष पाबंदियां: रूसी प्रतिबंधों को दरकिनार करने या उनकी मदद करने वाले देशों पर कठोर आर्थिक जुर्माने की व्यवस्था शामिल थी।

18 अक्टूबर 2026 को इन प्रावधानों की 30-दिवसीय समय-सीमा समाप्त होने वाली थी। उससे ठीक पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्यकारी आदेश जारी कर इस कानून के लागू होने पर रोक लगा दी।

 

भारत पर क्या होगा प्रभाव?

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विषयप्रभाव/स्थिति
तत्काल राहतप्रस्तावित 100% अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ टलने से भारतीय तेल आयातकों को तत्काल राहत मिली है।
ऊर्जा सुरक्षाभारत रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदकर अपनी घरेलू ईंधन कीमतों को स्थिर रखने में सफल रहा है।
मौजूदा शुल्क बरकरारयह छूट केवल नए कानून (ग्राहम एक्ट) के तहत रोकी गई है; अमेरिका द्वारा भारत पर पहले से लागू अन्य व्यापारिक शुल्क या प्रतिबंध समाप्त नहीं हुए हैं।
द्विपक्षीय व्यापार वार्ताटैरिफ टलने से भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक और रणनीतिक वार्ताओं के लिए सकारात्मक माहौल बना है।

 

वैश्विक तेल बाजार और भू–राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

वैश्विक ईंधन बाजार में स्थिरता

मध्य पूर्व की अनिश्चितताओं और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच यदि रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाया जाता, तो वैश्विक आपूर्ति बाधित हो सकती थी। इससे कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें अचानक आसमान छू सकती थीं, जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी घरेलू स्तर पर महंगे पेट्रोल-डीजल का सामना करना पड़ता।

अमेरिका में राजनीतिक आलोचना

डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले की अमेरिका के भीतर तीखी आलोचना हो रही है। कई सांसदों और विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि रूस पर आर्थिक दबाव कम करने से यूक्रेन के प्रति अमेरिकी नीति कमजोर दिखाई दे सकती है। वहीं, ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखना प्राथमिकता है।

रूस का रुख

रूसी अधिकारियों ने वाशिंगटन के इस कदम का स्वागत किया है। इसे मॉस्को और वाशिंगटन के बीच तनाव को नियंत्रित करने के एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

 

क्या यह छूट स्थायी है?

नहीं, यह छूट स्थायी नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रशासन रूस के ऊर्जा व्यापार और प्रतिबंधों से बचने की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखेगा। यदि भविष्य में अमेरिकी प्रशासन को लगता है कि रूस पर दोबारा दबाव बनाना आवश्यक है, तो राष्ट्रपति किसी भी समय इस छूट को वापस ले सकते हैं।

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1. डोनाल्ड ट्रंप ने किस कानून के तहत रूस पर लगने वाले टैरिफ को रोका है?

उत्तर: ट्रंप ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ के तहत प्रस्तावित नए टैरिफ और प्रतिबंधों को कार्यकारी आदेश जारी कर निलंबित किया है।

Q2. इस फैसले से भारत को क्या मुख्य फायदा हुआ है?

उत्तर: भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण अमेरिकी बाजार में अपने उत्पादों पर प्रस्तावित 100% तक के अतिरिक्त शुल्क का जो खतरा मंडरा रहा था, वह टल गया है।

Q3. क्या अमेरिका ने रूस पर से सभी पुराने प्रतिबंध हटा दिए हैं?

उत्तर: नहीं, अमेरिका ने रूस पर लगे सभी पुराने प्रतिबंध समाप्त नहीं किए हैं। केवल 2026 के नए कानून के तहत लागू होने वाले अतिरिक्त टैरिफ और पाबंदियों पर अस्थाई रोक लगाई गई है।

 

डिस्क्लेमर (Disclaimer)

यह लेख उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय समाचार रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों के आधार पर केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है। आर्थिक एवं रणनीतिक नीतियों में भविष्य में बदलाव संभव हैं।

 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।