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गहन और परतदार किरदारों से लेकर चालाक शकुनि तक: सोनी सब के हस्तिनापुर के वीर में चंदन आनंद बता रहे हैं अभिनय के अपने सफर के बारे में

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई, अक्टूबर, 2026: सोनी सब का हस्तिनापुर के वीर पांडवों और कौरवों के प्रारंभिक जीवन को जीवंत करता है और उन रिश्तों तथा अनुभवों को सामने लाता है, जो उनके व्यक्तित्व को आकार देते हैं। इस यात्रा में रहस्य और दिलचस्पी जोड़ने वाले किरदारों में से एक हैं शकुनि (चंदन आनंद), जिनकी बुद्धिमत्ता, पैनी नज़र और अपने आसपास के लोगों को प्रभावित करने की क्षमता उन्हें कहानी के सबसे बहुआयामी किरदारों में से एक बनाती है। विभिन्न प्रोजेक्ट्स में जटिल किरदार निभा चुके चंदन ने अपने काम के माध्यम से मानवीय व्यवहार के कई अलग‑अलग पहलुओं को बारीकी से परखा है। हर किरदार ने एक अभिनेता के रूप में उनके विकास में योगदान दिया है और शकुनि का किरदार निभाने से उन्हें चरित्र निर्माण की बारीकियों को और गहराई से समझने का एक नया अवसर मिला है।

जैसे‑जैसे चंदन आनंद शकुनि के किरदार को और गहराई से जी रहे हैं, वे उसके कई नए पहलुओं को खोजते जा रहे हैं। एक चतुर रणनीतिकार के रूप में अपनी पहचान से परे, शकुनि ऐसा व्यक्ति है, जो लोगों को बखूबी समझता है, उनकी कमजोरियों को पहचानता है और यह जानता है कि बातचीत के ज़रिए उनके विचारों को कैसे प्रभावित किया जा सकता है। अलग‑अलग किरदारों के साथ बातचीत करते समय उसकी बदलती हुई आवाज़ का लहजा हो या उसकी विशिष्ट शारीरिक मुद्राएँ, हर छोटी‑सी बारीकी उसके चित्रण में एक नई परत जोड़ती है। चंदन के लिए यह अनुभव इस बात को और मज़बूत करता है कि समय के साथ किसी किरदार को लेकर एक अभिनेता की समझ कितनी गहरी होती जाती है, जिससे उसके परिचित गुण भी नए अर्थ और नए आयाम लेकर सामने आते हैं।

अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए, चंदन आनंद ने साझा किया, “बीते कई सालों में मैंने महसूस किया है कि हर किरदार आपको अभिनय की कला के बारे में कुछ न कुछ नया सिखाता है। जब आप गहन और जटिल किरदार निभाते हैं, तो आप केवल सामने दिखने वाली बातों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि यह समझने की कोशिश भी करते हैं कि किसी व्यक्ति के फैसलों के पीछे क्या कारण हैं। मैंने सीखा है कि कई बार छोटी‑सी बारीकी भी दर्शकों को किसी किरदार के बारे में उतना बता सकती है, जितना कोई बड़ा नाटकीय दृश्य नहीं बता पाता। मैं इन बारीकियों को लगातार खोजता रहता हूँ, क्योंकि मैं चाहता हूँ कि शकुनि सिर्फ अपनी चतुर योजनाओं के लिए जाना जाने वाला किरदार न लगे, बल्कि एक ऐसा व्यक्ति दिखाई दे, जिसकी अपनी सोच और नज़रिया हो। यही लगातार खोजते रहने की प्रक्रिया मुझे एक अभिनेता के रूप में उत्साहित बनाए रखती है।”

हर सोमवार से शनिवार रात 9:00 बजे, केवल सोनी सब पर हस्तिनापुर के वीर देखना न भूलें।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।