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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और मालदीव की सांसद ने किया भारत का समर्थन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. मालदीव के नेताओं की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी पर द्वीप राष्ट्र चौतरफा घिर गया है. जहां टिप्पणी करने वाले नेताओं की देश के भीतर निंदा हो रही है. वहीं, दूसरे देश भी इसकी आलोचना कर रहे है. इस बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत का समर्थन किया है. उन्होंने कहा, ” भारत हमारा भरोसेमंद दोस्त है. उसने हमेशा हमारा समर्थन किया है. उसने हमारे लिब्रेशन आंदोलन के दौरा भी हमारा साथ दिया. जब हमने अपना पूरा परिवार खो दिया था तो उन्होंने हमें आश्रय दिया. हमारी शुभकामनाएं भारत के लोगों के साथ हैं.”

‘भारत से माफी मांगे मालदीव सरकार’
मालदीव की सांसद ईवा अबदुल्ला ने कहा कि सरकार ने अपने मंत्रियों की टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया है और उन्हें निलंबित कर दिया गया है, लेकिन मालदीव की सरकार को भारतीय लोगों से औपचारिक से माफी मांगनी चाहिए.” उन्होंने कहा, ”मंत्री की टिप्पणी बेहद शर्मनाक, नस्लवादी और बर्दाश्त के बाहर है.  मंत्री के शब्द मालदीव के लोगों की राय से बिल्कुल अलग हैं. हम अच्छी तरह जानते हैं कि मालदीव भारत पर कितना निर्भर है. जब भी हमें जरूरत पड़ी है, भारत हमेशा सबसे आगे रहा है.”

मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भी निंदा की
मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भी मालदीव के मंत्री की अपमानजनक टिप्पणियों की निंदा की. उन्होंने राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से सरकार को इस तरह की टिप्पणियों से दूर रखने का आग्रह किया. नशीद ने मुइज्जू से भारत को यह आश्वासन देने के लिए कहा कि इन टिप्पणियों का सरकार का कोई संबंध नहीं है.

पीएम मोदी ने शेयर की थीं लक्षद्वीप की तस्वीरें
बता दें कि पीएम मोदी ने 2 जनवरी को अपने लक्षद्वीप दौरा किया की तस्वीरें शेयर की थी, जिसमें उनकी स्नॉर्कलिंग की तस्वीरें भी शामिल थीं. तस्वीरें शेयर करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि जो लोग ऐडवेंचर पसंद करते हैं, उन्हें लक्षद्वीप को अपनी लिस्ट में शामिल करना चाहिए.
मरियम शिउना ने की थी विवादित टिप्पणी
मालदीव की मंत्री शिउना ने इन्हीं तस्वीरों को लेकर पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी की थी. हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी पोस्ट को डिलीट कर दिया. मालदीव की मंत्री शिउना की टिप्पणियों के संबंध में भारतीय उच्चायुक्त ने माले में मामला उठाया है.

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साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।