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150 से 200 किलोग्राम की है रामलला की प्रतिमा, मंगलवार से पूजन शुरू : चम्पत राय

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

लखनऊ. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर अयोध्या में तैयारी जोर-शोर से चल रही है. इस बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सोमवार (15 जनवरी) को बताया कि प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूजन विधि कल (मंगलवार, 16 जनवरी) से प्रांरभ हो जाएगी. चंपत राय ने आगे कहा कि यह पूजन विधि 21 जनवरी तक चलेगी. उन्होंने कहा, ”रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर शुरू होकर 1 बजे तक पूरी हो जाएगी. इसको लेकर प्लानिंग की जा रही है.”

चंपत राय ने क्या कहा?
चंपत राय ने बताया कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के चीफ मोहन भागवत अपने मनोभाव प्रकट करेंगे. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आगे कहा कि राम भगवान की प्रतिमा 150 से 200 किलोग्राम की है. दरअसल, 22 जनवरी को रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह है. इसमें विभिन्न क्षेत्र से आने वाली हस्तियां भी शामिल होगी.

अरुण योगीराज की बनाई गई रामलला की प्रतिमा का हुआ चयान
चंपत राय ने बताया कि मैसूरु के अरुण योगीराज (Arun yogiraj) की बनाई गई रामलला की नयी प्रतिमा को राम मंदिर में स्थापित करने के लिए चुना गया है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रामलला की वर्तमान प्रतिमा भी नए राम मंदिर में रखी जाएगी. उन्होंने आगे कहा कि लोग 23 जनवरी से राम मंदिर (Ram Temple) में भगवान राम (Lord Ram) के दर्शन कर सकेंगे.

साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।