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जहां भगवान राम ने रावण को हराने की ली थी शपथ, वहां पहुंचे नरेंद्र मोदी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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चेन्नई. अयोध्या में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह से पहले पीएम मोदी तमिलनाडु के अरिचल मुनाई पहुंचे. इससे पहले उन्होंने श्री कोठंडारामा स्वामी मंदिर में भी पूजा की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (21 जनवरी) को तमिलनाडु के धनुषकोडी स्थित अरिचल मुनाई का दौरा किया और समुद्र तट पर पुष्पांजलि अर्पित की. माना जाता है कि धनुषकोडी ही वह स्थान है, जहां भगवान राम ने रावण को हराने की शपथ ली थी.

इस संबंध में पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “अरिचल मुनाई में रहने का अवसर मिला, जो प्रभु श्री राम के जीवन में एक विशेष महत्व रखता है. यह राम सेतु का स्टार्टिंग पॉइंट है.” इससे पहले मोदी ने श्री कोठंडारामा स्वामी मंदिर में पूजा की. कोठंडारामा नाम का अर्थ धनुषधारी राम होता है. यह धनुषकोडी में ही स्थित है. ऐसा कहा जाता है कि रावण के भाई विभीषण पहली बार भगवान राम से यहीं पर मिले थे और उनसे शरण मांगी थी.

गौरतलब है कि पीएम मोदी सोमवार (22 जनवरी) को अयोध्या में होने वाले रामलला प्राण-प्रतिष्ठा से पहले यहां पहुंचे हैं. इससे पहले शनिवार (20 जनवरी) को उन्होंने तिरुचिरापल्ली में श्री रंगनाथस्वामी मंदिर और रामेश्वरम में श्री अरुल्मिगु रामनाथस्वामी मंदिर का दौरा किया था. अयोध्या में भगवान रामलला की मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में रखी जा चुके है. ‘रामलला’ की मूर्ति मैसूर स्थित मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाई है. मूर्ति 51 इंच लंबी है और इसका वजन 1.5 टन है.

मूर्ति में भगवान राम को पांच साल के बच्चे के रूप में चित्रित किया गया है. प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के बाद रामलला को अर्पित किया जाने वाला ’56 भोग प्रसाद’ भी लखनऊ से अयोध्या पहुंच गया है.

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साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।