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श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले में नहीं हो मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी, 29 फरवरी को फिर सुनवाई

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. मथुरा की श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद को लेकर दाखिल अर्जियों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज की सुनवाई पूरी हुई. आज की सुनवाई में हिंदू पक्ष की तरफ से दाखिल की गई. याचिकाओं की पोषणीयता पर बहस हुई. आज मुख्य रूप से मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीलें  पेश की. दोपहर 2 बजे से शाम चार बजे तक दो घंटे मुस्लिम पक्ष की ओर से सीनियर अधिवक्ता तसनीम अहमदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बहस की. मुस्लिम पक्ष की बहस आज भी पूरी नहीं हो सकी है. 29 फरवरी को सुबह 11.30 बजे से अगली सुनवाई होगी.

अगली सुनवाई पर भी मुस्लिम पक्ष की ओर से बहस जारी रहेगी. मुस्लिम पक्ष की बहस पूरी होने के बाद हिंदू पक्ष को अपनी दलीलें पेश करने का  मौका मिलेगा. मुस्लिम पक्ष की ओर से ऑर्डर 7 रूल्स 11 के तहत अर्जियों की पोषणीयता को चुनौती दी गई है. मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील दी जा रही है कि हिंदू पक्ष की ओर से दाखिल याचिकाएं पोषणीय नहीं है. 1968 में हुए समझौते को लेकर भी मुस्लिम पक्ष ने दलील पेश की है.इसके तहत ही केशव देव कटरा की 13.7 एकड़ जमीन शाही ईदगाह मस्जिद को दी गई है.

‘कोर्ट कर रहा 18 अर्जियों पर सुनवाई’ 

मुस्लिम पक्ष ने 1991 के प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट, लिमिटेशन एक्ट, वक्फ एक्ट और स्पेशल रिलीफ एक्ट का हवाला दिया हैं. यह मामला इन चार एक्ट से बाधित है, इसलिए उनकी सुनवाई यहां नहीं हो सकती है. जस्टिस मयंक कुमार जैन की सिंगल बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है. आज की सुनवाई में भी विवादित परिसर का अमीन सर्वे कराए जाने की मांग को लेकर दाखिल अर्जी पर सुनवाई नहीं हो सकी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट 18 अर्जियों पर एक साथ सुनवाई कर रहा है. अयोध्या विवाद की तर्ज पर जिला अदालत के बजाय हाईकोर्ट में सीधे तौर पर मामले की सुनवाई हो रही है. ज्यादातर अर्जियों में शाही ईदगाह मस्जिद को हिंदुओं का धार्मिक स्थल बताकर उसे हिंदुओं को सौंपे जाने की मांग की गई है.

साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।