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खिचड़ी घोटाले के सरगना हैं संजय राउत : संजय निरुपम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. कांग्रेस के पूर्व नेता संजय निरुपम ने शिवसेना (यूबीटी) नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने सोमवार को कोविड के दौरान हुए खिचड़ी घोटाले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने संजय राउत को खिचड़ी चोर बताते हुए कहा कि मुझे दुख है कि मैं अपने मित्र के बारे में कुछ कहने जा रहा हूं। इस पूरे ख‍िचड़ी घोटाले के सूत्रधार शिव सेना (यूबीटी) प्रवक्ता संजय राउत हैं। इस घोटाले में उन्होंने अपनी बेटी, भाई और पार्टनर के नाम पर पैसे लिए हैं। उन्होंने इस नाम पर चेक के जरिए रिश्वत ली है। उनकी बेटी विधिता संजय राउत की, जो खुद मासूम है और इन बातों से अनजान है।

संजय निरुपम ने राउत पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके भाई संदीप राउत के अकाउंट में अगस्त 2020 में 5 लाख रिश्वत के पैसे आए थे। संजय राउत के दोस्त सुजीत पाटणकर के बैंक अकाउंट में भी कई बार रिश्वत पैसा आया था। 33 रुपये में 300 ग्राम खिचड़ी देने का कॉन्ट्रैक्ट सह्याद्री रिफ्रेशमेंट को मिला था। आगे इस कंपनी ने एक दूसरी कंपनी को 16 रुपये में 100 ग्राम खिचड़ी बांटने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था। राउत और अमोल कीर्तिकर ने गरीबो का 200 ग्राम खिचड़ी कोविड के दौरान चुराया।

संजय राउत को बताया घोटाले का सरगना

संजय ने कहा कि उत्तर पश्चिम मुंबई से शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा उम्मीदवार (अमोल कीर्तिकर) को ईडी ने समन भेजा है। पूछताछ के बाद ईडी क्या करेगी ये मुझे नहीं पता, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं उन्होंने खुलासा किया कि जब मैंने इस घोटाले पर काम करना शुरू किया तो मुझे पता चला कि इस घोटाले का सरगना कोई और है। इस पूरे घोटाले का सरगना शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता संजय राउत हैं।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।