लोड हो रहा है...

कांग्रेस के सूरत प्रत्याशी नीलेश कुंभानी का नामांकन हुआ रद्द

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

अहमदाबाद. सूरत लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार नीलेश कुंभानी का नामांकन फॉर्म जिला निर्वाचन अधिकारी ने रद्द कर दिया है। नामांकन दाखिल करने के तीन दिन बाद शनिवार को एक हाई वोल्टेज ड्रामा चला। बीजेपी के दिनेश जोधानी ने कांग्रेस के कैंडिडेट निलेश कुम्भानी के फॉर्म में उनके तीन प्रस्तावकों के हस्ताक्षर को लेकर सवाल उठाए थे। जिसके बाद दिनेश जोधानी ने कांग्रेस उम्मीदवार निलेश कुम्भानी के तीनों प्रस्तावक के हस्ताक्षर को लेकर चुनाव अधिकारी से शिकायत की थी। वहीं, अपने साथ प्रस्तावकों को न रख पाने पर कांग्रेस कैंडिडेट निलेश कुम्भानी ने कहा, मेरी सुबह प्रस्तावकों से बात हुई थी, उन्होंने कहा था कि 9 बजे तक कलेक्टर ऑफिस आ जाएंगे, हमें उम्मीद थी वो आएंगे लेकिन अब सभी के फोन बंद है।

दरअसल, नीलेश कुंभानी के प्रस्तावक में उनके बहनोई, भांजे और भागीदार के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया था। लेकिन तीनों प्रस्तावकों ने चुनाव अधिकारी के सामने शनिवार को एफिडेविट देकर कहा कि निलेश कुम्भानी के फॉर्म में उनके हस्ताक्षर नहीं है, जिसके बाद से तीनों प्रस्तावक गायब है। इस मामले में आज रविवार को चुनाव अधिकारी की ओर से सुनवाई की गई। हालांकि, सुनवाई के दौरान मौजूद कांग्रेस उम्मीदवार नीलेश कुंभानी के साथ झड़प हो गई। यह भी पता चला कि प्रस्तावक आज सुबह से अपना प्रस्ताव नहीं उठा रहे हैं। सुनवाई के बाद चुनाव अधिकारी ने उनका नामांकन रद्द कर दिया।

गौरतलब है कि बीजेपी प्रत्याशी मुकेश दलाल के चुनाव एजेंट दिनेश जोधानी ने फॉर्म वेरिफिकेशन के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी नीलेश कुम्भानी के फॉर्म को लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था, “मुझे जानकारी है कि कांग्रेस प्रत्याशी के तीनों प्रस्तावक के हस्ताक्षर सही नहीं है।” इसकी जानकारी कांग्रेस प्रत्याशी के चुनाव एजेंट फिजिक कोल्डी को दी गई। इस पूरे घटनाक्रम में सुनवाई शनिवार को हुई थी। जिसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार के फॉर्म पर प्रस्ताव के तौर पर हस्ताक्षर करने वाले जगदीश सावलिया, रमेश पोलारा और ध्रुविन धमेलिया ने चुनाव अधिकारी के सामने पेश होकर कहा कि उन्होंने फॉर्म पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, और इसके संबंध में तीनों ने एक हलफनामा भी दाखिल किया। नतीजा ये हुआ कि पूरे मामले में हाईवोल्टेज ड्रामा मच गया।

साभार : दैनिक जागरण

- Advertisement -

फेसबुक पेज : https://www.facebook.com/profile.php?id=61558434413602

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।