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मजदूरों व किसानों के अकाउंट से अचानक गायब हुए रुपये

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के बांदा में सैकड़ों मजदूरों और किसानों ने एक बैंक के बाहर धरना दिया। उनका आरोप है कि उनके खातों में जमा पैसे अचानक गायब हो गए हैं। बैंक मैनेजर ने कहा कि आरोप पूरी तरह से फर्जी हैं।

यह है पूरा मामला

यूपी के बांदा में ग्रामीणों, किसानों और मजदूरों ने एक बैंक में हंगामा किया। उनका कहना था कि हमारे खातों से मजदूरी, लोन के पैसे, किसान सम्मान निधि और पेंशन के पैसे अचानक गायब हो गए। बैंक कर्मचारियों ने धोखाधड़ी कर पैसे निकाल लिए हैं। यहां करीब 300 से 400 पीड़ित पहुंचे थे, जिन्होंने आरोप लगाया कि अफसरों से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। दरअसल, यह मामला जसपुरा थाना क्षेत्र के गड़रिया गांव का है। यहां रहने वाले सैकड़ों मजदूरों और किसानों के गांव की बैंक में खाते हैं। सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे उनके खातों में आता है।

जल शक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद से की लिखित शिकायत

ग्रामीणों का कहना है कि हमारे खाते में जमा पैसा अचानक गायब हो गया। उनके पैसे को धोखाधड़ी कर दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया गया है। इसकी शिकायत उन्होंने बांदा में बैंक मैनेजर और अफसरों से की, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। इसके बाद उन्होंने बैंक के बाहर धरना देकर पैसा दिलाने की मांग की।

जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने जल शक्ति राज्यमंत्री रामकेश निषाद से लिखित शिकायत की, जिस पर मंत्री ने तत्काल डीएम, एसपी और बैंक के वरिष्ठ अफसरों को जांच कर कार्रवाई करने के आदेश दिए।

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रामकेश निषाद ने कहा ये

जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद ने कहा कि आज गड़रिया गांव के निवासी और किसान आए थे। उन्होंने अपने गांव में बैंक खाते खुलवाए थे और अपनी मेहनत की कमाई जमा की थी। सभी ने शिकायत की है कि उनके खातों से धोखाधड़ी करके पैसे निकाले गए हैं और उनका ट्रांजेक्शन दूसरे खातों में किया गया है। इस मामले में मैंने तुरंत डीएम, एसपी और बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को जांच के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

साभार : इंडिया न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।