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असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ हिन्दू संगठनों ने किया विरोध प्रदर्शन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. संसद में शपथ लेने के दौरान हैदराबाद  से सांसद व एआईएमआईएम ( AIMIM ) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ‘जय फलस्तीन’ के नारे लगाए थे. इसके बाद देश में ओवैसी के इस बयान पर सियासत तेज हो गई. इस मुद्दे पर AIMIM नेता के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन और बयानबाजी का दौर जारी है. इसी कड़ी में रविवार को हिंदूवादी संगठनों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और ओवैसी के खिलाफ नारेबाजी की.

विश्व हिंदू परिषद ( VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर सांसद असदुद्दीन ओवैसी ( Asaduddin Owaisi ) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया और उनका पुतला भी दहन किया. प्रदर्शन में भारी तदादा में कई हिन्दू संगठनों के सदस्यों ने हिस्सा लिया था. प्रदर्शन के दौरान हिंदू संगठन से जुड़े लोगों ने AIMIM सांसद ओवैसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. वहीं, इस दौरान बड़ी तादाद में दिल्ली पुलिस के जवान भी मौजूद रहे.

दरअसल, 25 जून को संसद में शपथ ग्रहण के दौरान MP असदुद्दीन ओवैसी ने “जय फलस्तीन” का नारा लगाया था. इसके बाद इस नारे को लेकर लगातार हिंदूवादी उनके खिलाफ प्रदर्श कर रहे हैं. इसस पहले 28 जून को अज्ञात लोगों ने उनके सरकारी आवास पर इसराइल के समर्थन में पोस्टर भी चिपका दिए थे.

ओवैसी हैदराबाद सीट से जीते हैं लगातार पांचवीं बार चुनाव

वहीं, कई सियासी दलों के नेताओं भी असदुद्दीन ओवैसी के “जय फलस्तीन”  नारे पर नाराजगी जाहिर किए हैं.  बताते चलें कि ओवैसी हैदराबाद सीट से लगातार पांचवीं बार संसद पहुचे हैं. वो पहली बार साल 2004 में इस सीट से सांसद पहुंचे थे. 18वीं लोकसभा चुनाव में AIMIM नेता ने भारतीय जनता पार्टी की कैंडिडेट माधवी लता को तकरीबन तीन लाख 40 हजार मतों से पराजित कर संसद पहुंचे हैं.

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साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।