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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को देखते हुए स्थगित की गई नीट-यूजी परीक्षा की काउंसलिंग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. NEET परीक्षा शुरुआत से ही विवादों में घिरी हुई है. बड़ी संख्या में टॉपर्स और ग्रेस मार्क्स के बाद ये मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. NTA ने 23 जून को इसका री एग्जाम करवाया था. 6 जुलाई यानी कि आज से नीट-यूजी की काउंसलिंग होनी थी. लेकिन काउंसलिंग को अब स्थगित कर दिया गया है. अब जल्द ही नई तारीख का ऐलान किया जाएगा. अगले आदेश तक काउंसलिंग को स्थगित कर दिया गया है. हालांकि अब तक पहले 6 जुलाई को काउंसलिंग होने की उम्मीद जताई जा रही थी.

NTA की तरफ से करवाए गए नीट एग्जाम का रिजल्ट आने के बाद से ही लगातार विवाद चल रहा है. 1563 छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए गए थे, जिसके बाद धांधली का  मामला उठने लगा. सुप्रीम कोर्ट ने 23 जून को री एग्जाम करवाया था. 1563 स्टूडेंट्स में से सिर्फ 813 स्टूडेंट्स ने ही फिर से परीक्षा दी थी. जिन स्टूडेंट्स ने री-एग्जाम पास कर लिया है उनकी काउंसलिंग होनी है. लेकिन आज होने वाली काउंसलिंग स्थगित हो गई है.

NEET एग्जाम के कितने टॉपर?

बता दें कि इस साल नीट एग्जाम में 67 उम्मीदवारों ने टॉप किया था.जबकि पिछले साल टॉपर्स सिर्फ 2 थे. वहीं NTA ने समय की बर्बादी की बात कहते हुए 1500 से ज्यादा छात्रों को ग्रेस मार्क्स भी दिए थे. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 23 जून को दोबारा परीक्षा करवाए जाने का विकल्प दिया था.

क्या है NEET परीक्षा विवाद?

मेडिकल के लिए प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (Medical entrance exam NEET-UG) में कई गड़बड़ियों की बात सामने आई है. 24 लाख से ज्यादा परीक्षार्थियों ने एग्जाम दिया था. जिसमें छात्रों को ज्यादा नंबर दिए जाने का आरोप लगा था. आरोप ये भी लगा कि कई उम्मीदवारों के नंबरों को गलत तरीके से घटाया और बढ़ाया गया, जिससे उनकी रैंक प्रभावित हुई. र पड़ा है. वहीं छह केंद्रों पर परीक्षा में होने वाली देरी की वजह से समय की बर्बादी की भरपाई के लिए 1,500 से ज्यादा छात्रों को  ग्रेस मार्क्स भी दिए गए थे. जिसके बाद बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन भी हुए.

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।