शुक्रवार, सितंबर 18 2026 | 08:40:24 PM

श्रीनगर में सालों बाद मिली मुहर्रम जुलूस की अनुमति, फहराया गया फलस्तीन का झंडा, समर्थन में नारेबाजी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

जम्मू. कश्मीर के शिया समुदाय ने सोमवार को पारंपरिक गुरु बाजार-डलगेट मार्ग पर शोक के आठवें मुहर्रम का जुलूस निकाला। अधिकारियों ने बताया कि जुलूस शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, क्योंकि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का प्रबंध किया गया था। जुलूस सोमवार तड़के शहर के गुरु बाजार इलाके से शुरू हुआ और जहांगीर चौक और मौलाना आजाद रोड से होते हुए निर्धारित मार्ग से गुजरा और फिर डलगेट पर समाप्त हुआ।

दो जगहों पर लहराया गया फलस्तीन का झंडा

इस जुलूस के दौरान एक दो अन्य स्थानों पर फलस्तीन झंडा लहराने और नारों की खबरें इंटरनेट मीडिया पर दिख रहीं। यह लगातार दूसरा साल है, जब अधिकारियों ने मुहर्रम जुलूस को पारंपरिक मार्ग से निकालने की अनुमति दी है। कश्मीर में आतंकवाद के पनपने के बाद जुलूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, क्योंकि आशंका थी कि अलगाववादी भीड़ का गलत मकसद से दुरुपयोग कर सकते हैं।

जुलूस के लिए दिया गया था सीमित समय

अधिकारियों ने जुलूस के लिए सीमित समय दिया था, इसलिए सुबह 5.30 बजे हजारों लोग गुरु बाजार में एकत्र हुए, ताकि सामान्य जीवन प्रभावित न हो। अधिकारियों ने बताया कि यातायात विभाग ने मुहर्रम जुलूस के दौरान अपनाए जाने वाले मार्गों के बारे में शहर के निवासियों को जानकारी दे दी गई थी।

साभार : दैनिक जागरण

- Advertisement -

भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

https://www.amazon.in/dp/9392581181/

https://www.flipkart.com/bharat-1857-se-1957-itihas-par-ek-drishti/p/itmcae8defbfefaf?pid=9789392581182

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।