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पेरिस ओलंपिक 2024 में सेमीफाइनल में पहुँची भारतीय हॉकी टीम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
5 Min Read

नई दिल्ली. पेरिस ओलंपिक 2024 में भारतीय हॉकी टीम सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है. भारत ने क्वार्टर फाइनल मैच में ग्रेट ब्रिटेन को पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से रौंदकर सेमीफाइनल में जगह बनाई. दोनों टीमों ने मैच के दौरान 1-1 गोल किया और मुकाबला बराबरी छूटा। इसके बाद सांसें थम देने वाले पेनल्टी शूटआउट में भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने कमाल दिखाते हुए ब्रिटेन के दो गोल रोके और दूसरी तरफ हरमनप्रीत संग भारत के चार खिलाड़ियों ने लगातार गोल कर जीत तक पहुंचाया.

पेनल्टी शूटआउट में ऐसे जीता भारत

पूरे 42 मिनट दस खिलाड़ियों के साथ खेलने के बावजूद भारतीय हॉकी टीम ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए पेनल्टी शूटआउट में ब्रिटेन को 4-2 से हराकर पेरिस ओलंपिक के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया. निर्धारित समय तक मैच 1-1 से बराबर रहने के बाद पेनल्टी शूटआउट हुआ. इसमें भारत के लिये कप्तान हरमनप्रीत सिंह, सुखजीत सिंह, ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल ने गोल किये, जबकि ब्रिटेन के दो शॉट पी आर श्रीजेश ने बचा लिये.

42 मिनट 10 खिलाड़ियों के साथ खेला भारत

पीआर श्रीजेश पेनल्टी शूटआउट के हीरो रहे, जिन्होंने 2 गोल बचाकर भारत को जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई. भारत इस क्वार्टर फाइनल मैच में 42 मिनट तक 10 खिलाड़ियों के साथ खेला, क्योंकि अमित रोहिदास को रेड कार्ड दिया गया था. तारीफ करनी होगी भारतीय डिफेंस की जिसने ब्रिटेन के हर हमले का बचाव करते हुए उसे बढत नहीं बनाने दी. ब्रिटेन ने 28 बार भारतीय गोल पोस्ट पर हमला बोला और महज एक कामयाबी मिली. शूटआउट में इंग्लैंड के जेम्स अलबेरी और जाक वालांस ही गोल कर सके. कोनोर विलियमसन का निशाना चूका और फिलिप रोपर का शॉट श्रीजेश ने बचाया. टोक्यो ओलंपिक में ब्रिटेन को ही हराकर भारतीय टीम अंतिम चार में पहुंची थी. श्रीजेश तोक्यो में ब्रॉन्ज मेडल के मुकाबले में जर्मनी के खिलाफ भी भारत की दीवार साबित हुए थे और उन्होंने पेरिस ओलंपिक के अब तक के सबसे कठिन मुकाबले में भी अपेक्षाओं पर खरे उतरकर दिखाया.

हरमनप्रीत ने फिर किया गोल

निर्धारित समय में भारत के लिये हरमनप्रीत ने 22वें और ली मोर्टन ने 27वें मिनट में गोल दागा था. रोहिदास को रेड कार्ड मिलने का ब्रिटेन ने फायदा उठाते हुए 19वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर बनाया, लेकिन गोल नहीं कर सके. भारत को जवाबी हमले में 22वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे हरमनप्रीत ने गोल में बदला. यह पेरिस ओलंपिक में उनका सातवां गोल था. ब्रिटेन टीम गेंद पर कंट्रोल के मामले में भारत पर लगातार भारी रही और 25वें मिनट में मिले पेनल्टी कॉर्नर पर उसे वैरिएशन आजमाया लेकिन खाता नहीं खुल सका.

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ब्रिटेन को ऐसे मिला पहला गोल

अब तक शानदार प्रदर्शन कर रहे भारतीय डिफेंस में पहली बार चूक देखी गई और 27वें मिनट में सर्कल पर से गोल के सामने मिली गेंद को मोर्टन ने गोल के भीतर डाला. तीसरे क्वार्टर में भारतीय टीम फिर गेंद पर नियंत्रण के लिये जूझती नजर आई. ब्रिटेन ने पहले ही मिनट से आक्रामक खेल दिखाया और 36वें मिनट में उसे पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिस पर फर्लोंग का शॉट श्रीजेश ने बचाया. ब्रिटेन को तीन मिनट बाद 8वां पेनल्टी कॉर्नर मिला जिस पर पहला और रिबाउंड दोनों शॉट भारतीय डिफेंडरों ने बचाये. तीसरे क्वार्टर के आखिरी मिनट में सुमित को ग्रीन कार्ड मिलने से चौथे क्वार्टर के पहले दो मिनट भारत को 9 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा.

चौथे क्वार्टर फाइनल में नहीं हुआ गोल

ब्रिटेन ने चौथे क्वार्टर में लगातार हमले बोलने का सिलसिला जारी रखा, लेकिन भारत की तारीफ करनी होगी कि दस खिलाड़ियों के साथ उसने गोल नहीं गंवाया. इससे पहले शुरूआती क्वार्टर में भारतीय डिफेंस ने जबर्दस्त मुस्तैदी दिखाते हुए ब्रिटेन के कई हमलों को नेस्तनाबूद किया. दोनों टीमों को पहले 15 मिनट में तीन तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन गोल नहीं हो सका. इंग्लैंड को पांचवें ही मिनट में रेफरल पर पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला जिस पर अनुभवी डिफेंडर अमित रोहिदास ने जेरेथ फर्लोंग का शॉट बचाया. अगले ही पल मिले दूसरे पेनल्टी कॉर्नर पर जैक वालेर का शॉट भी ओडिशा के इस खिलाड़ी ने बखूबी बचाया.

साभार : जी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।