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मनीष सिसोदिया को मिली सुप्रीम कोर्ट से जमानत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है. सिसोदिया को मिली जमानत पर आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा- मनीष जी की बेल से बहुत ख़ुशी है. उम्मीद है अब वो लीड लेकर सरकार को सही दिशा में लेके चलेंगे. वहीं सिसोदिया को मिली जमानत पर भारतीय जनता पार्टी के नेता दुष्यंत गौतम ने कहा कि कोर्ट ने जमानत दी है, बरी नहीं हुए हैं. वे आज भी गुनहगार हैं. इतना ज्यादा उत्साहित होने की जरूरत नहीं है. जमानत शर्तों पर दी गई है उसका निर्वहन करते रहिए और देखिते रहिए कि आगे क्या क्या होता है. कोर्ट को गुमराह करने की जरूरत नहीं है. केस वैसे के वैसे ही बने हुए हैं. लोकतंत्र  में सबको सोचने विचारने का मौका मिलता है.

सिसोदिया के वकील ने क्या कहा?

आबकारी नीति अनियमितताओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आप नेता मनीष सिसोदिया को जमानत दिए जाने पर मनीष सिसोदिया का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ऋषिकेश कुमार ने कहा, “कोर्ट ने कहा है कि अगर आपके पास सबूत हैं तो छेड़छाड़ का कोई मामला नहीं बनता. अगर आपने उन्हें इतने लंबे समय तक जेल में रखा है तो यह जमानत के सिद्धांतों के खिलाफ है. चाहे ईडी का मामला हो या धारा 45 का, जमानत का मुख्य नियम वहां लागू होता है. और यह ध्यान में रखते हुए कि मनीष सिसोदिया पहले ही 17 महीने जेल में रह चुके हैं, सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की सभी दलीलों को खारिज कर दिया और उन्हें जमानत दे दी. कोर्ट ने यह भी कहा है कि ईडी ने कोर्ट में जो बयान दिया है कि ट्रायल 6-8 महीने में खत्म हो जाएगा, ऐसा नहीं लगता कि यह खत्म होगा…”

साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।