लोड हो रहा है...

दो से अधिक बच्चे वाले सरकारी कर्मचारियों को नहीं मिलेगा प्रमोशन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जयपुर. 2 से ज्यादा बच्चों वाले राज्य कर्मचारियों को प्रमोशन देने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगाई है, जिसमें सरकार इन कर्मचारियों को बैक डेट से प्रमोशन दे रही थी। जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस विनोद कुमार भारवानी की खंडपीठ ने यह आदेश संतोष कुमार और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। इस आदेश से हजारों कर्मचारी प्रभावित होंगे। याचिकाओं में कहा गया था कि सरकार 16 मार्च 2023 की अधिसूचना से उन कर्मचारियों को बैक डेट से पदोन्नति दे रही है, जिनके दो से ज्यादा बच्चे होने के कारण 5 साल या 3 साल के लिए प्रमोशन रोके गए थे। इन कर्मचारियों को बैक डेट से प्रमोशन देने पर हमारी वरिष्ठता सूची में बदलाव आ गया है, हम वरिष्ठता सूची में नीचे चले गए हैं, जिससे हमारी पदोन्नति प्रभावित हो रही है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार की अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी।

रिव्यू डीपीसी करके दिया जा रहा था प्रमोशन

याचिकाकर्ताओं के वकील शोभित तिवाड़ी ने बताया- साल 2001 में राज्य सरकार ने नोटिफिकेशन जारी करके 1 जून 2002 के बाद तीसरा बच्चा पैदा होने पर सरकारी कर्मचारी को 5 साल के लिए प्रमोशन से वंचित करने का नियम लागू किया था। साल 2017 में सरकार ने 5 साल की अवधि को घटाकर 3 साल कर दिया था, लेकिन पिछले साल कार्मिक विभाग ने 16 मार्च 2023 को अधिसूचना जारी करके कहा कि ऐसे सभी कर्मचारी जिनकी पदोन्नति दंड स्वरूप रोकी गई थी। उन्हें उनके पदोन्नति वर्ष से ही प्रमोशन का लाभ दिया जाए। ऐसे में राज्य सरकार के करीब 125 विभागों में रिव्यू डीपीसी के माध्यम से ऐसे सभी कर्मचारियों को उनकी प्रारंभिक पदोन्नति की तिथि से प्रमोशन का लाभ दिया जा रहा था। इसे बारां और झालावाड़ के पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

जो पूर्व में अयोग्य घोषित, उसे योग्य नहीं माना जा सकता

याचिकाओं में कहा गया था कि सरकार ने पहले अधिसूचना जारी करके उन कर्मचारियों को अयोग्य घोषित करके प्रमोशन से वंचित किया था, जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं। ऐसे में अब उन्हीं कर्मचारियों को फिर से प्रमोशन के लिए योग्य नहीं माना जा सकता है। वहीं बैक डेट से प्रमोशन देना भी कानून सम्मत नहीं हैं। कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सरकार के नोटिफिकेशन पर रोक लगाते हुए जवाब मांगा है।

साभार : दैनिक भास्कर

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।