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हम-आप सब जब त्रिशूल की रक्षा करेंगे तो त्रिशूल से भी हमारी रक्षा होगी : गिरिराज सिंह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. बिहार के बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पर शनिवार को एक युवक ने हमला कर दिया. इसके बाद गिरिराज सिंह काफी बदल-बदले नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया से लेकर मीडिया से बातचीत के दौरान वह अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं. बता दें कि उनपर हमला तब हुआ जब वह जनता दरबार में लोगों की बात सुन रहे थे. घटना बेगूसराय के बलिया प्रखंड की है. सुरक्षकर्मियों ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान मोहम्मद सैफी के रूप में की गई है. अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाले मंत्री इस हमले के बाद तल्ख नजर आ रहे हैं. उन्होंने X पर एक फोटो पोस्ट किया है. इस फोटो में वह त्रिशूल के साथ नजर आ रहे हैं. इस पोस्ट को अब तक 97 हजार से ज्यादा लोगों ने देखा है और 10 हजार से ज्यादा लोगों ने लाइक किया है.

पोस्ट में गिरिराज सिंह ने क्या लिखा

हालांकि फोटो में उनके हाथ में त्रिशूल जरूर है लेकिन. उनकी भाव-भंगिमाएं काफी शांत है. हमेशा की तरह उन्होंने अपने माथे पर महाकाल लिखा टोपी पहन रखा है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा ‘त्रिशूल हमारा गौरव व स्वाभिमान है. हम-आपसब जब त्रिशूल की रक्षा करेंगे तो त्रिशूल से भी हमारी रक्षा होगी. धर्म के रक्षार्थ यह आवश्यक भी है और हमारा कर्तव्य भी है.’ कई लोग इस पोस्ट के राजनीतिक मायने निकाल रहे हैं.

हमले के बाद क्या बोले थे गिरिरिाज

अपने ऊपर हुए कथित हमले पर गिरिराज सिंह ने कहा था कि ‘इस चुनाव में बेगूसराय में मुसलमानों का मेरे प्रति जो रवैया रहा और जो नतीजे आए, उसके अनुसार योगी आदित्यनाथ ने सही कहा कि बटोगे तो कटोगे. अगर इस आदमी के हाथ में रिवॉल्वर होता तो जिस तरह से इसने हमला किया, उसी तरह से मुझे मार भी देता. इसने बहुत ही अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया… मैं अपना काम जारी रखूंगा, मैं अपने लक्ष्य से नहीं भटकूंगा, मैं किसी की धमकी से नहीं डरूंगा, मैं अपना अभियान जारी रखूंगा. चाहे कितने भी आतंक फैलाने वाले लोग आ जाएं, मुझ पर इसका कोई असर नहीं होगा… मेरे क्षेत्र में मुसलमानों ने इतना विरोध प्रदर्शन किया, उसी का नतीजा है कि इनकी इतनी हिम्मत आ गई कि जब मैं जनता दरबार में था, तो सारे SDO, DSP की मौजूदगी के बावजूद इसने इतनी बदतमीजी से पेश आया…’

साभार : न्यूज़18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।