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भारत ने पेरिस पैरालंपिक में जीते रिकॉर्ड पदक, भेजी थी सबसे बड़ी टीम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

नई दिल्ली. पेरिस पैरालंपिक 2024 खेलों में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। भारतीय एथलीट्स ने कमाल करते हुए सोमवार को आठ पदक और मंगलवार को पांच पदक जीते। वहीं, बुधवार को एक पदक जीता। इस पैरालंपिक में भारत के पदकों की संख्या अब तक 21 पहुंच चुकी है। भारत इस बार 25 पार के लक्ष्य को लेकर इन खेलों में उतरा है। ऐसे में भारतीय एथलीट्स इस लक्ष्य को हासिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अवनि लेखरा से शुरू हुई कहानी जारी है और सातवें दिन भी कई पदक आ सकते हैं। पेरिस पैरालंपिक में 84 पैरा एथलीट्स भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इन खेलों का आयोजन आठ सितंबर तक होना है। भारत 12 डिसिप्लिन में प्रतिस्पर्धा कर रहा है, जो टोक्यो से तीन ज्यादा हैं।

पैरालंपिक खेलों में अब तक भारत का प्रदर्शन

पैरालंपिक्सएथलीट्सस्वर्णरजतकांस्यकुलरैंक
1960 रोमहिस्सा नहीं लिया
1964 टोक्यो
1968 तेल अवीव100000
1972 हाइडेलबर्ग10100125
1976 टोरंटोहिस्सा नहीं लिया
1980 आर्नहेम
1984 स्टोक मंसीविल/न्यूयॉर्क5022437
1988 सियोल20000
1992 बार्सिलोना90000
1996 अटलांटा90000
2000 सिडनी40000
2004 एथेंस12101253
2008 बीजिंग50000
2012 लंदन10010167
2016 रियो डी जनेरियो19211443
2020 टोक्यो545861924
2024 पेरिस84381021*अभी
तय नहीं
2028 लॉस एंजिलिसआगामी
2032 ब्रिस्बेन
 कुल पदक (51): 12 स्वर्ण, 19 रजत और 20 कांस्य

क्या इस उपलब्धि को पीछे छोड़ पाएंगे?

भारत के लिए पेरिस पैरालंपिक सबसे सफल पैरालंपिक साबित हुआ है। टोक्यो पैरालंपिक 2020 इससे पहले भारत का सबसे सफल पैरालंपिक रहा था। उसमें भारत ने 54 एथलीट्स भेजे थे और 19 पदक जीतने में कामयाब रहे थे। इनमें पांच स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य पदक शामिल थे। भारत ने 21 पदकों के साथ ही टोक्यो पैरालंपिक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। हालांकि, इस बार स्वर्ण की संख्या अभी भी टोक्यो से कम है। टोक्यो पैरालंपिक में भारत ने इन खेलों के इतिहास के सबसे ज्यादा स्वर्ण जीते थे। भारतीय एथलीट्स अगर छह स्वर्ण जीतने में कामयाब रहते हैं तो यह रिकॉर्ड भी टूट जाएगा। टोक्यो 2020 में भारत का रैंक 24 रहा था, जो कि अब तक का सर्वश्रेष्ठ है। भारत के पास इस उपलब्धि को पीछे छोड़ने का शानदार मौका है।

पैरालंपिक 2024 में इन्होंने जीते पदक

  • अवनि लेखरा: स्वर्ण पदक: निशानेबाजी
  • मोना अग्रवाल: कांस्य पदक: निशानेबाजी
  • प्रीति पाल: कांस्य पदक: एथलेटिक्स
  • मनीष नरवाल: रजत पदक: निशानेबाजी
  • रुबीना फ्रांसिस: कांस्य पदक: निशानेबाजी
  • प्रीति पाल: कांस्य पदक: एथलेटिक्स
  • निषाद कुमार: रजत पदक: एथलेटिक्स
  • योगेश कथुनिया: रजत पदक: एथलेटिक्स
  • नितेश कुमार: स्वर्ण पदक: बैडमिंटन
  • मनीषा रामदास: कांस्य पदक: बैडमिंटन
  • तुलसीमति मुरुगेसन:रजत पदक: बैडमिंटन
  • सुहास एलवाई: रजत पदक: बैडमिंटन
  • राकेश कुमार/शीतल देवी: कांस्य पदक: तीरंदाजी
  • सुमित अंतिल: स्वर्ण पदक: एथलेटिक्स
  • नित्या श्री सिवान: कांस्य पदक: बैडमिंटन
  • दीप्ति जीवनजी: कांस्य पदक: एथलेटिक्स
  • अजीत सिंह:रजत पदक: एथलेटिक्स
  • सुंदर सिंह गुर्जर: कांस्य पदक:एथलेटिक्स
  • शरद कुमार:रजत पदक: एथलेटिक्स
  • मरियप्पन थंगावेलु: कांस्य पदक:एथलेटिक्स

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।