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अपर्णा यादव ने संभाला उत्तर प्रदेश महिला आयोग के उपाध्यक्ष का पद

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव ने अब अपना पद संभाल लिया है. अपर्णा यादव ने पद संभालते ही बीते करीब एक सप्ताह से चली आ रही अटकलों पर अब विराम लगा दिया है. इसके साथ ही उन्होंने बतौर उत्तर प्रदेश महिला आयोग के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल ली है. अपर्णा यादव जब बुधवार को उपाध्यक्ष का पद संभाल रही थीं उस वक्त उनके साथ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की पत्नी नम्रता पाठक भी मौजूद रहीं. इस दौरान दोनों ने मीडिया के तमाम सवालों का जवाब दिया. उन्होंने अपने बयानों के जरिए आगे के अपने विजन को बताया और साथ ही महिलाओं के लिए अपनी प्रतिबद्धता को फिर दोहराया है.

दरअसल, बीते बुधवार को यूपी महिला आयोग के सदस्यों की लिस्ट जारी हुई थी. शासन के ओर से जारी अधिसूचना में बबिता चौहान को बतौर अध्यक्ष जगह दी गई थी. जबकि अपर्णा यादव को इसमें उपाध्यक्ष बनाया गया था. इसके बाद अपर्णा यादव के नाराज होने की अटकलें थीं. लेकिन अब अटकलों पर ब्रेक लग गया है. गौरतलब है कि बीते करीब एक सप्ताह तक यह अटकलें चलती रही कि अपर्णा यादव नई जिम्मेदारी से खुश नहीं हैं. कई मीडिया रिपोर्टस में ये दावा किया गया कि वह फिर से समाजवादी पार्टी में जाने का विचार कर रही हैं और परिवार के संपर्क में हैं. उनकी शिवपाल यादव से मुलाकात का भी दावा कुछ मीडिया रिपोर्ट में किया गया.

हालांकि सूत्रों की मानें तो अपर्णा यादव से प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने बात की और तब मामला सुलझना शुरू हो गया. इसके बाद अपर्णा यादव की बात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई. अमित शाह से बात होने के बाद यह तस्वीर साफ हो गई और बीजेपी नेता ने सीएम योगी आदित्यनाथ से जाकर मुलाकात की और फिर बुधवार को अपना पद संभाला है.

साभार : एबीपी न्यूज़

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।