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75 वर्षीय अभिनेत्री हेमा मालिनी ने नवरात्र के अवसर पर निभाया मां दुर्गा का किरदार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

लखनऊ. दिग्गज एक्ट्रेस हेमा मालिनी ने बड़े पर्दे पर दशकों तक अपनी एक्टिंग और डांस से फैंस का दिल जीता है। 75 साल की उम्र में भी, वह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दिखाते हुए अपनी डांस परफॉर्मेंस से प्रेरणा देती रहती हैं। मथुरा में एक बार फिर से हेमा मालिनी का डांस देखने को मिला। नव दुर्गा महोत्सव के दौरान मां दुर्गा बनकर उन्होंने खूबसूरती से परफॉर्म किया और कला के प्रति अपने जुनून को साफ-साफ दिखाया। हेमा मालिनी को इस अंदाज में डांस करते देख फैंस की खुशी चरम पर है। नवरात्रि के चौथे दिन, Hema Malini ने उत्तर प्रदेश के मथुरा में मंच पर दो घंटे तक शानदार तरीके से डांस किया, जिसने वहां बैठे लोगों का दिल जीत लिया। चूंकि उन्होंने मां दुर्गा के कई रूपों को दिखाया, उनकी परफॉर्मेंस और भी अधिक इमोशनल बन गईं और दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।

हेमा मालिनी की परफॉर्मेंस

दुर्गा सप्तशती पर आधारित नृत्य नाटिका में दिव्य स्त्री की शक्ति को दिखाते हुए हेमा मालिनी ने परफॉर्म किया। हेमा मालिनी ने माता सती और पार्वती बनकर दिल जीत लिया। उन्होंने इस तरह के रोल्स भी अपनी फिल्मों में किए हैं। अपनी परफॉर्मेंस के बाद, हेमा ने अपनी खुशी जताते हुए एएनआई से कहा, ‘मैं आज यहां परफॉर्म करके बहुत खुश हूं। कार्यक्रम देखने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी यहां थे और उन्होंने यहां मेरे द्वारा किए गए कामों के लिए मेरी तारीफ की।’

शिक्षा और कला दोनों जरूरी- हेमा मालिनी

इससे पहले, हेमा मालिनी ने जीवन में शिक्षा के साथ-साथ कला को शामिल करने के महत्व पर बात की थी। उन्होंने कहा, ‘शैक्षणिक शिक्षा जरूरी है, लेकिन बच्चों के लिए कला में रुचि पैदा करना भी उतना ही जरूरी है। यह शिक्षा और व्यक्तित्व के लिए काफी बेहतर साबित होता है और आत्मनिर्भरता की भावना को बढ़ावा देता है।’

अक्सर परफॉर्म करती हैं हेमा

ये पहली बार नहीं है कि हेमा मालिनी ने ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम में परफॉर्म किया हो, बल्कि इससे पहले भी वो मथुरा में कई बार अपनी कला दिखा चुकी हैं और हर बार उन्हें उतना ही प्यार मिलता है।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।