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विद्रोहियों ने सीरिया पर किया कब्जा, राष्ट्रपति बशर अल-असद ने छोड़ा देश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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दमिश्क. राजधानी दमिश्‍क में विद्रोहियों के कब्‍जा के बाद सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी जलाली का एक बयान सामने आया. जिसमें उन्होंने कहा है कि वह लोगों के चुने गए किसी भी नेतृत्व के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने नागरिकों से सार्वजनिक सुविधाओं में तोड़फोड़ न करने का आग्रह भी किया है.

दमिश्क पर विद्रोही का कब्जा

सीरिया की राजधानी दमिश्‍क पर विद्रोहियों ने कब्‍जा कर लिया है. समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, विद्रोही लड़ाके रविवार सुबह-सुबह राजधानी दमिश्क में घुस आए और दमिश्क पर कब्जा कर लिया. एपी की रिपोर्ट के अनुसार, सीरियाई सरकारी टीवी ने वीडियो प्रसारित कर कहा कि राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से हटा दिया गया है और सभी जेल बंदियों को रिहा कर दिया गया है.

देश से भागे राष्ट्रपति

देश में बिगड़ते हालातों को देखते हुए सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद एक विशेष विमान से दमिश्‍क छोड़कर भाग गए हैं. हालांकि वो किस जगह गए हैं, उसकी जानकारी अभी तक सामने नही आई है. बशद अल-असद के देश छोड़ने के साथ ही असद परिवार के 50 साल का शासन का अंत आज हो गया है. सीरियाई रक्षा मंत्री के बारे में भी कुछ जानकारी सामने नहीं आ रही और कहा जा रहा है कि शायद वो भी देश से भाग गए हैं.

ज्यादातर सैनिक भी भागे

रिपोर्ट्स के मुताबिक विद्रोहियों के दमिश्क पहुंचने के बाद कई इलाकों में तैनात असद के सैनिक भी वहां से भाग गए हैं. अपनी जान बचाने के लिए असद के सैनिक सिविल ड्रेस में वहां से भागे हैं.

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सरकारी इमारतों पर किया कब्जा

विद्रोहियों ने रक्षा मंत्रालय, पब्लिक रेडियो, टीवी स्‍टेशन सहित कई सरकारी इमारतों पर भी कब्जा कर लिया है. दमिश्‍क पर कब्जा करने के साथ ही विद्रोहियों ने जश्‍न भी मनाया और आजादी के नारे लगाए.

प्रधानमंत्री का आया बयान

दमिश्क में विद्रोहियों के कब्जे के तुरंत बाद सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी जलाली का बयान भी सामने आया है. सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद गाजी जलाली ने साफ किया है कि वो अपना देश छोड़कर भागने वाले नहीं है. सीरियाई प्रधानमंत्री ने कहा है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से सत्‍ता को विपक्ष के हाथों में सौंपेंगे. जलाली ने कहा, “मैं सभी से अपने देश के बारे में सोचने का आग्रह करता हूं. हम विपक्ष की ओर हाथ बढ़ाते हैं, जिन्होंने अपना हाथ बढ़ाया है और कहा है कि वे इस देश से जुड़े किसी भी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे.”

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।