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जामा मस्जिद सर्वे रिपोर्ट : गुंबद की चेन मंदिरों में घंटा लगाने के लिए होती है प्रयोग

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के संभल जिले के शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. सूत्रों के मुताबिक सर्वे के पहले दिन यानी कि 19 नवंबर को मस्जिद के अंदर करीब डेढ़ घंटे की वीडियोग्राफी हुई. जबकि दूसरे दिन करीब तीन घंटे की वीडियोग्राफी एएसआई की टीम ने की. सूत्रों के मुताबिक सर्वे रिपोर्ट में करीब साढ़े चार घंटे की वीडियोग्राफी सर्वे के दौरान की गई है. इसके अलावा तकरीबन 1200 के करीब फोटो लिए गए. मस्जिद के अंदर वट वृक्ष भी मौजूद है. मस्जिद में कुआं भी मौजूद है, जो आधा अंदर है और आधा बाहर है.

वहीं बाहर वाले हिस्से को ढक दिया गया है. जबकि कुंआ का आधा हिस्सा मस्जिद के अंदर है. 50 से ज्यादा फूल के निशान मिले हैं. इसके अलावा गुंबद के हिस्से को प्लेन कर दिया गया है. पुराने निर्माण को बदलने के भी सबूत मिले हैं. वहीं मस्जिद के अंदर नए कंस्ट्रक्शन के भी सबूत मिले हैं. एक तिकोना शेप पर प्लास्टर लगा कर पेंट कर दिया गया है. मस्जिद के अंदर जहा बड़ा गुम्बद है, उस गुम्बद पर झुमूर को तार से बांध कर एक चेन से लटकाया गया है. वैसे चैन का इस्तेमाल मंदिर के घंटो में किया जाता है.

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि शाही जामा मस्जिद के पास पुलिस चौकी का निर्माण वक्फ की जमीन पर किया जा रहा है, हालांकि जिलाधिकारी ने आरोपों का खंडन करते हुए उसे नगर पालिका की संपत्ति बताया. मंगलवार को ओवैसी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘संभल की जामा मस्जिद के पास जो पुलिस चौकी बनाई जा रही है, वह वक्फ की जमीन पर है जैसा कि रिकॉर्ड में दर्ज है. इसके अलावा, प्राचीन स्मारक अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारकों के पास निर्माण कार्य प्रतिबंधित है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संभल में इस माहौल बनाने के जिम्मेदार हैं.’

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।