लोड हो रहा है...

बद्री केदार मंदिर समिति ने तेलंगाना को भेजा नोटिस, मंदिरों के नामों से नाराज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

देहरादून. तेलंगाना में पंच केदार और बद्रीनाथ धाम मंदिर निर्माण पर बद्री केदार मंदिर समिति ने आपत्ति जताई है। बद्री केदार मंदिर समिति की तरफ से श्री दक्षिणेश्वर केदारनाथ मंदिर ट्रस्ट और उत्तराखंड कल्याणकारी संस्था को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है।

बद्री केदार के नाम और दोनों धाम के फोटो के इस्तेमाल करने पर कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। बद्री केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्य अधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल की ओर से नोटिस जारी किया गया है। कहा गया है कि श्री दक्षिणेश्वर केदारनाथ मंदिर ट्रस्ट की ओर से तेलंगाना में पंच केदार मंदिर का निर्माण और बद्रीनाथ धाम का निर्माण किया जा रहा है मंदिर निर्माण के प्रचार प्रसार में भी केदारनाथ धाम की फोटो का इस्तेमाल किया गया है जो की ठीक नहीं है।

धार्मिक भावनाओं के खिलाफ

मंदिर समिति का कहना है कि इससे सनातन धर्मावलंबियों की आस्था को ठेस पहुंचती है। समिति की ओर से तेलंगाना में बद्रीनाथ मंदिर का निर्माण करने पर उत्तराखंड कल्याणकारी संस्था को भी नोटिस जारी किया गया है। मंदिर गर्भगृह को पूरी तरह से बद्रीनाथ धाम मंदिर के प्राकृतिक स्वरूप में बनाया जा रहा है, जो धार्मिक मान्यताओं, भावनाओं और सनातन आस्था के खिलाफ है। बद्री केदार मंदिर समिति ने दोनों संस्थाओं से 15 दिन के अंदर जवाब मांगा है।

पहले भी हो चुकी है आपत्ति

इससे पूर्व भी उत्तराखंड कल्याणकारी संस्था द्वारा बद्रीनाथ धाम मंदिर निर्माण का कार्य करने पर आपत्ति जताई गई है। बद्रीनाथ धाम के पंडा पुरोहितों द्वारा इससे पूर्व भी आपत्ति जताई गई थी। कहा गया था कि बद्रीनाथ धाम का निर्माण कहीं और होना धर्म विरुद्ध है और अब बद्री केदार मंदिर समिति की तरफ से संस्था को नोटिस भेजा गया है।

- Advertisement -

साभार : नवभारत टाइम्स

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।