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महाकुंभ 10 दिनों के अंदर 9 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लखनऊ. प्रयागराज की धरती पर 144 साल बाद लगे महाकुंभ में श्रद्धालुओं का जनसमुद्र थमने का नाम नहीं ले रहा है. महाकुंभ मेले में दसवें दिन भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. दोपहर 12 बजे तक 30 लाख 47 हजार श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई, जिसमें 10 लाख कल्पवासियों और 20 लाख 47 हजार श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी में स्नान किया. अब तक महाकुंभ में लगभग 9 करोड़ 24 लाख से ज्यादा श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा चुके हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि 26 फरवरी तक चलने वाले महाकुंभ में 45 करोड़ श्रद्धालुओं डुबकी लगाएंगे.

बता दें कि महाकुंभ मेला प्रशासन को उम्मीद है कि 29 जनवरी को दूसरे अमृत स्नान मौनी अमवस्या पर करीब 8 से 10 करोड़ श्रद्धालु संगम तट पहुंचेंगे. लिहाजा योगी सरकार की तरफ से भी पूरी तैयारी की गई है. मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में ट्रैफिक डायवर्जन भी किया गया है. पांच दिन तक प्रयागराज नो व्हीकल जोन घोषित किया गया है.

आज सीएम योगी अपने कैबिनेट संग लगाएंगे डुबकी

उधर योगी सरकार की कैबिनेट बैठक आज महाकुंभ नगर में चल रही है. कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने 54 मंत्रियों के साथ संगम में डुबकी लगाएंगे. इस बीच बुधवार को डीजीपी प्रशांत कुमार ने भी संगम में आस्था की डुबकी लगाई. डीजीपी प्रशांत कुमार वीआईपी घाट से मोटर बोट से त्रिवेणी संगम पहुंचे. पवित्र त्रिवेणी संगम में स्नान के बाद सूर्य देवता को अर्घ्य दिया. मां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती से प्रदेश में सुख शांति और खुशहाली की कामना की. कैबिनेट बैठक को लेकर कल शाम ही डीजीपी प्रशांत कुमार प्रयागराज पहुंच गए थे. डीजीपी ने चीफ सेक्रेटरी और अन्य अधिकारियों के साथ कल देर रात तक मेला क्षेत्र का भ्रमण भी किया था.

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।