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मुस्लिम होने के कारण भारत में होगा उत्पीड़न : तहव्वुर राणा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

लंदन. 2008 मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा ने एक बार फिर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। राणा ने अपनी अपील में भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की मांग की है। राणा ने कहा है कि उसे भारत में प्रताड़ित किया जा सकता है। क्योंकि वह पाकिस्तान मूल का है।

हाल ही में पीएम मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान ट्रंप प्रशासन ने तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण की आखिरी मंजूरी दे दी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया था कि उनके प्रशासन ने 26/11 मुंबई आतंकी हमलों में अपनी भूमिका के लिए भारतीय जांच एजेंसियों की ओर से वांछित तहव्वुर राणा को भारत में न्याय का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित करने की मंजूरी दे दी है। राणा ने अपने आवेदन में कहा है कि वह कई बीमारियों से पीड़ित है। वह हृदय धमनी विकार, पार्किंसंस और यूरिनल कैंसर का रोगी है। राणा के वकीलों का तर्क है कि वह मुकदमे का सामना करने के लिए लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकता है।

कौन है तहव्वुर राणा

तहव्वुर हुसैन राणा  (63 वर्षीय) पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है। राणा, पाकिस्तानी सेना में भी काम कर चुका है और सेना में डॉक्टर रहा। हालांकि 90 के दशक में राणा कनाडा चला गया और फिर उसने वहीं की नागरिकता ले ली थी। कनाडा से तहव्वुर राणा अमेरिका पहुंचा और वहां उसने शिकागो में एक इमिग्रेशन कंसल्टेंसी फर्म खोली। मुंबई हमले का दोषी डेविड हेडली, तहव्वुर राणा का दोस्त था। दावा है कि तहव्वुर राणा ने ही डेविड हेडली को अपराध की दुनिया में धकेला। हेडली ने ही 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के लिए रेकी की। हेडली को बाद में अमेरिका से गिरफ्तार किया गया था।

हेडली से पूछताछ में ही तहव्वुर राणा की मुंबई हमले में संलिप्तता का खुलासा हुआ था। राणा को साल 2009 में अमेरिकी जांच एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किया गया था। मुंबई हमले से पहले डेविड हेडली ने मुंबई में ताज महल होटल और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस जैसी प्रमुख जगहों की रेकी की थी। हेडली, तहव्वुर राणा की इमिग्रेशन कंसल्टेंसी फर्म का कर्मचारी था। जांचकर्ताओं का मानना है कि हेडली ने तहव्वुर राणा के इशारे पर ही ये काम किया।

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सुप्रीम कोर्ट ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी

जनवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी, क्योंकि कोर्ट ने मामले में उसकी समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया था। भारत ने पिछले महीने कहा था कि वह तहव्वुर राणा के जल्द प्रत्यर्पण के लिए अमेरिकी अधिकारियों के साथ काम कर रहा है।

26 नवंबर 2008 को हुआ था आतंकी हमला

26 नवंबर 2008 को 10 पाकिस्तानी आतंकियों के एक समूह ने अरब सागर में समुद्री मार्ग के जरिए भारत की वित्तीय राजधानी में घुसने के बाद एक रेलवे स्टेशन, दो होटलों और एक यहूदी केंद्र पर हमला किया था। लगभग 60 घंटे तक चले इस हमले में 166 लोग मारे गए थे, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। हमले के बाद आतंकी अजमल आमिर कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था। नवंबर 2012 में अजमल आमिर कसाब को पुणे की यरवदा जेल में फांसी पर लटका दिया गया था।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।