लोड हो रहा है...

तमिलनाडु के वन मंत्री पोनमुडी ने सनातन धर्म पर दिया विवादित बयान

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

चेन्नई. तमिलनाडु के वन मंत्री और वरिष्ठ डीएमके नेता के पोनमुडी एक सार्वजनिक समारोह में अपने भाषण के कारण विवादों में आ गए, जिसमें उन्होंने हिंदू धार्मिक पहचान को यौन स्थितियों से जोड़ने वाली टिप्पणी की थी।। कार्यक्रम के एक वायरल वीडियो में पोनमुडी को यह कहते हुए सुना गया है, “महिलाओं, कृपया गलतफहमी न पालें,” इसके बाद वह एक चुटकुला सुनाते हैं जिसमें एक आदमी एक सेक्स वर्कर से मिलने जाता है, जो फिर उस आदमी से पूछती है कि वह शैव है या वैष्णव। किस्से में, जब आदमी को समझ में नहीं आता है, तो वह यह पूछकर स्पष्ट करती है कि क्या वह पट्टाई (क्षैतिज तिलक, जो शैव धर्म से जुड़ा है) या नामम (वैष्णव धर्म से जुड़ा हुआ लंबवत तिलक) पहनता है। फिर वह समझाती है कि अगर वह शैव है, तो स्थिति “लेटी हुई” है, और अगर वैष्णव है, तो स्थिति “खड़े होने” की है।

DMK सांसद ने की निंदा

DMK सांसद कनिमोझी ने पोनमुडी के बयान की निंदा की। एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मंत्री पोनमुडी का हालिया भाषण अस्वीकार्य है। भाषण का कारण चाहे जो भी हो, ऐसी अश्लील टिप्पणियाँ निंदनीय हैं।” भाजपा तमिलनाडु प्रमुख के अन्नामलाई ने मंत्री पोनमुडी की विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर डीएमके की आलोचना की और इसे पार्टी के राजनीतिक विमर्श का मानक बताया। अन्नामलाई ने लिखा, “केवल यह मंत्री ही नहीं, डीएमके का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र अश्लील, अपशब्दों वाला और असभ्य है। शर्म से सिर झुकाओ, थिरु @mkstalin, ऐसे अपमानजनक समूह का नेतृत्व करने के लिए।” अभिनेत्री और भाजपा नेता खुशबू सुंदर ने एक्स पर एक पोस्ट में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को टैग करते हुए पूछा, “क्या आपमें कभी हिम्मत होगी कि आप उन्हें उनकी कुर्सी और पद से हटा सकें? या आप और आपकी पार्टी महिलाओं और हिंदू धर्म का अपमान करने में परपीड़क सुख पाते हैं?”

साभार : इंडिया न्यूज

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

- Advertisement -

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।