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पाकिस्तान ने एफएम रेडियो पर भारतीय गानों पर लगाया प्रतिबंध

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

इस्लामाबाद. पहलगाम आतंकी हमले के बाद एक बार फिर पाकिस्तान और भारत के बीच तनावपूर्ण माहौल है. भारत ने हाल में ही कड़े फैसले लिए थे और पड़ोसी मुल्क की हालत खराब कर दी.अब इस बीच बिलबिलाते हुए पाकिस्तान ने भी एक फैसला लिया है.जिसके बाद पाकिस्तान की जनता इंडियन गानों के लिए भी तरसती नजर आएगी. पहलगाम हमले के बाद से पाकिस्तान और भारत के बीच टेंशन बढ़ गई जिसका सीधा असर आर्टिस्ट पर भी पड़ा है. बीती रात को कई पाकिस्तानी सितारों के इंस्टाग्राम अकाउंट को भारत में बैन कर दिया गया. इस बीच दिग्गज गायिक कविता कृष्णमूर्ती ने पाकिस्तानी कलाकारों पर बैन पर रिएक्शन देते हुए कहा था कि संगीत का कोई धर्म नहीं होता. लेकिन अब पाकिस्तान में सभी इंडियन गानों को बैन कर दिया गया है.

पाकिस्तान सरकार ने बैन किए इंडियन सॉन्ग

पाकिस्तान की सरकार ने एक बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने बॉलीवुड गानों पर प्रतिबंध लगाने की जानकारी दी है. सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि अब पाकिस्तानी एफएम रेडियों स्टोशन पर भारतीय गाने नहीं बजाए जाएंगे. बयान में ये भी कहा गया कि ये फैसला पूरे देश के मूड को ध्यान में रखते हुए लिया गया. दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तानी सरकार ने इस फैसले के लिए अपने ही मंत्रालय की पीठ भी थपथपा दी.

भारत में बैन हुए थे पाक सेलेब्स के इंस्टाग्राम

भारत में पाकिस्तान के कई बड़े और जाने माने स्टार के इंस्टाग्राम अकाउंट शो नहीं हो रहे हैं. इसकी वजह है कि बीते दिन पाकिस्तान की कई जानी मानी हस्तियों जैसे हानिया आमिर, माहिरा खान, आयजा खान, इकरा अजीज जैसे एक्टर्स के इंस्टाग्राम रिस्ट्रिक्ट कर दिए गए थे. इतना ही नहीं पाक चैनल भी भी बैन कर दिए गए थे. बता दें कि पहलगाम हिंदू नरसंहार के बाद से ही हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच जुबानी जंग छिड़ी हुई है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है. ऐसे में आतंकवादियों की पनाहगाह पाकिस्तान को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है.

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।