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हमने दुश्मन को उस भाषा में जवाब देने का फैसला किया है जिसे वह अच्छी तरह समझता है : शहबाज शरीफ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

इस्लामाबाद. भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति के बीच भले सीजफायर हो गया गया हो लेकिन पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और उसने एलओसी पर इसे तोड़ दिया. शनिवार (10 मई, 2025) को कई घंटों के नाटकीय घटनाक्रम के बाद इसकी घोषणा की गई. इसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने देश की आवाम को संबोधित किया और झूठ का पुलिंदा रखा. उन्होंने भारत पर युद्ध का आरोप लगाया. प्रधानमंत्री शहबाज ने भारत के साथ हाल ही में हुए युद्ध विराम को सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से लेकर चीन, सऊदी अरब, तुर्किए, ब्रिटेन, यूएन प्रमुख और अन्य कई हस्तियों और सहयोगी देशों को धन्यवाद दिया.

शहबाज शरीफ कैसे बने झूठ की फैक्ट्री?

युद्ध के डर से भारत को सीजफायर के लिए फोन लगाने वाले पाकिस्तान ने इसे अपनी जीत बताया. शहबाज शरीफ ने कहा, “यह हमारे सिद्धांतों और सम्मान की जीत है. हमने दुश्मन के खिलाफ वही किया जो एक सम्माननीय राष्ट्र के लिए उचित है. यह सिर्फ सशस्त्र बलों की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की जीत है.” शहबाज ने फर्जी दावा किया और कहा कि भारत के राफेल लड़ाकू विमानों को पाकिस्तानी वायुसेना ने निशाना बनाया और विफल कर दिया.

शहबाज शरीफ के बड़े-बड़े दावे

शहबाज शरीफ ने सैन्य प्रतिष्ठानों और जल भंडारों पर हमला करने का झूठा दावा किया. उन्होंने शेखी बघारते हुए कहा, “हमने दुश्मन को उस भाषा में जवाब देने का फैसला किया है जिसे वह अच्छी तरह समझता है. हमने स्पष्ट कर दिया है कि अब जो बैठकें टेबल पर होनी थीं, वे युद्ध के मैदान में होंगी.”

शहबाज शरीफ का एक और झूठा दावा

शहबाज शरीफ ने झूठा दावा करते हुए कहा, ”अपने अहंकार में भारत ने व्यर्थ में हमारी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश की. ड्रोन और मिसाइलों के ज़रिए निर्दोष लोगों, मस्जिदों और नागरिक आबादी को निशाना बनाया गया और हमारे धैर्य की परीक्षा ली गई.” जबकि भारतीय सेना ने साफ कहा कि उसने सिर्फ और सिर्फ आतंकी ठिकानों और सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।