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बॉलीवुड अभिनेता मुकुल देव का निधन, कई हिंदी फिल्मों में किया था काम

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
4 Min Read

नई दिल्ली. फिल्म जगत से एक दुखद खबर आ रही है जिसने लोगों को चौंका दिया है. सन ऑफ सरदार और यमला पगला दीवाना जैसी फिल्मों में नजर आए मशहूर अभिनेता मुकुल देव का निधन हो गया है.वह सिर्फ 54 साल के थे. मुकुल देव को ‘सन ऑफ सरदार’, ‘आर…राजकुमार’, ‘जय हो’ जैसी फिल्मों में उनके काम के लिए जाना जाता है.

 शुक्रवार रात को हुई थी मौत

जानकारी के अनुसार मुकुल देव की मौत शुक्रवार रात को हुई. शनिवार को जब उनके दोस्तों को उनकी मौत की खबर मिली तो वे उनके घर पहुंचे. उनकी मौत के कारणों की पुष्टि नहीं हो सकी है. उनके परिवार और दोस्तों की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है.

दोस्तों और प्रशंसकों को लगा बड़ी झटका

मुकुल देव के निधन से उनके दोस्तों और प्रशंसकों को बड़ा झटका लगा है. उनके दोस्तों की लिस्ट भले ही छोटी रही हो लेकिन वह हमेशा अपनी खुशमिजाजी के लिए जाने जाते रहे हैं. बॉलीवुड में एक प्रयोगधर्मी अभिनेता के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपने अजीज दोस्त के दुनिया से अलविदा कहने पर दुख जताते हुए उन्हें याद किया है.

मनोज वाजपेयी का झलका दर्द

एक्टर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया और कहा कि मैं जो महसूस कर रहा हूं उसे शब्दों में बयां करना असंभव है. मुकुल एक भाई की तरह थे, एक कलाकार जिनकी गर्मजोशी और जुनून बेजोड़ था. बहुत जल्दी, बहुत कम उम्र में चले गए. उनके परिवार और इस नुकसान से दुखी सभी लोगों के लिए शक्ति और उपचार की प्रार्थना करता हूं. मिस यू मेरी जान… जब तक हम फिर से नहीं मिलते.ओम शांति

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दस्तक से आर…राजकुमार में दिखाया अदाकारी का जलवा

मुकुल देव बॉलीवुड में एक जाना माना नाम रहे हैं. वह अपने पीछे हजारों फैंस के दिलों को छोड़ गए हैं. उन्होंने छोटे पर्दे से लेकर बड़े पर्दे तक खूब नाम कमाया है. उन्होंने फिल्मों में अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल से की थी, जिससे उन्हें फिल्म देखा और नाम क्या है में रोल मिला, लेकिन यह फिल्म बंद हो गई. इसके बाद उन्होंने 1996 में दस्तक से एसीपी रोहित मल्होत्रा ​​के तौर पर अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की, इसी फिल्म में मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन भी नजर आई थीं. उसके बाद वह किला (1998), वजूद (1998), कोहराम (1999) और मुझे मेरी बीवी से बचाओ (2001) जैसी कई फिल्मों में नजर आए. हाल के सालों में उन्होंने यमला पगला दीवाना (2011), सन ऑफ सरदार (2012), आर…राजकुमार (2013) और जय हो (2014) जैसी फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाई.

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।