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अमृत उद्यान का ग्रीष्मकालीन वार्षिकोत्सव 16 अगस्त से 14 सितंबर तक जनता के लिए खुला रहेगा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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अमृत उद्यान का ग्रीष्मकालीन वार्षिकोत्सव 16 अगस्त से 14 सितंबर, 2025 तक जनता के लिए खुला रहेगा। इस दौरान, उद्यान सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक खुला रहेगा, और अंतिम प्रवेश शाम 5:15 बजे होगा। रखरखाव के कारण उद्यान सभी सोमवार को बंद रहेगा।

राष्ट्रीय खेल दिवस और शिक्षक दिवस के अवसर पर क्रमशः 29 अगस्त को एथलीटों और खिलाड़ियों को तथा 5 सितम्बर को शिक्षकों को अमृत उद्यान में विशेष प्रवेश दिया जायेगा।

आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास नॉर्थ एवेन्यू मार्ग के पास स्थित गेट संख्या 35 से होगा। अमृत उद्यान में प्रवेश निःशुल्क होगा। आगंतुक visit.rashtrapatibhavan.gov.in पर ऑनलाइन अपना स्लॉट बुक कर सकते हैं। प्रत्यक्ष आगंतुक गेट संख्या 35 के बाहर स्थित स्वयं-सेवा कियोस्क का उपयोग करके पंजीकरण करा सकते हैं।

आगंतुक उद्यान के अंदर मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक चाबियां, पर्स, हैंडबैग, पानी की बोतलें, बच्चों की दूध की बोतलें और छाते ले जा सकते हैं। इनके अलावा, कोई अन्य वस्तु ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

गार्डन ट्रेल में बाल वाटिका, हर्बल गार्डन, बोनसाई गार्डन, सेंट्रल लॉन, लॉन्ग गार्डन और सर्कुलर गार्डन शामिल होंगे। पूरे सर्किट में लगाए गए क्यूआर कोड आगंतुकों को विभिन्न पौधों और डिज़ाइन विशेषताओं के बारे में जानकारी प्रदान करेंगे।

इस वर्ष, आगंतुकों को एक नई विशेषता-बैबलिंग ब्रुक-देखने को मिलेगी। इस भूदृश्य क्षेत्र में शामिल हैं:

● झरने, फुहारे युक्‍त मूर्तिकलाएं, सीढीदार पत्थर और भूमि से ऊपर बने तालाब के साथ एक घुमावदार जलधारा

● आकर्षक पथों के साथ जुड़ा पंचतत्व ट्रेल्स और प्राकृतिक ध्वनि परिदृश्यों से युक्‍त एक शांत बरगद उपवन

● एक शांत हर्बल और प्लूमेरिया गार्डन, जिसमें मनमोहक घास के टीले और बागान हैं जो आत्मिक शांति का अनुभव प्रदान करते हैं।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।