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यूक्रेन समझौते के लिए रूस को किसी भी हालत में नहीं देगा अपनी जमीन : जेलेंस्की

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कीव. रूस और यूक्रेन के बीच लगातार बमबारी हो रही है। इस युद्ध में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध को समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने शांति समझौते के तहत यूक्रेन की कुछ जमीन को छोड़ने की बात कही थी। इस पर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपना रूख साफ कर दिया। उनका कहना है कि रूस द्वारा कब्जाए यूक्रेनी क्षेत्रों को नहीं छोड़ा जाएगा। वह किसी भी हालत में अपनी जमीन रूस को नहीं देंगे। जेलेंस्की का यह बयान ट्रंप के लिए एक झटका माना जा रहा है।

15 अगस्त को अलास्का में ट्रंप और पुतिन में होगी मुलाकात

दरअसल, 15 अगस्त को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अलास्का में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात के दौरान ट्रंप यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध को लेकर भी पुतिन से बात करने वाले हैं। उन्होंने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल ट्रुथ से इसकी जानकारी साझा की थी। इस दौरान उन्होंने एक ऐसी बात बताई, जिसे सुनने के बाद जेलेंस्की नाराज हो गए। दरअसल, ट्रंप ने कहा कि रूस ने यूक्रेन की जमीनों पर कब्जा किया हुआ है। समझौते के तहत यह जमीन रूस की ही रहेगी, यूक्रेन को इसे छोड़ना होगा।

जेलेंस्की ने ट्रंप को दिया जवाब

डोनाल्ड ट्रंप की बात से नाराज यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की शनिवार को इसका जवाब दिया। जेलेंस्की का कहना है कि हम रूस को किसी भी हालत में अपनी जमीन नहीं देंगे। शांति समझौता ऐसे नहीं होगा। यह समझौता एक तरह से हमारे खिलाफ ही होगा। यूक्रेन ऐसे किसी भी फैसले को नहीं मानेगा, जिससे उसकी जमीन पर किसी दूसरे का कब्जा हो जाए।

यूक्रेन ने अमेरिका को सौंपी शांति समझौते की सूची

बताया जा रहा है कि यूक्रेन ने रूस के साथ शांति समझौते की एक सूची अमेरिका को सौंपी है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है। यूक्रेन की सूची से रूस को भी अवगत कराया गया है। रूस की तरफ से इस सूची पर अभी तक किसी भी तरह की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि वो कब्जा की हुई जमीन को नहीं छोड़ेंगे।

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साभार : न्यूज24

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।