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तुर्की के बालिकेसिर में आया 6.1 तीव्रता का भूकंप, एक व्यक्ति की मौत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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अंकारा. तुर्की के उत्तर-पश्चिमी प्रांत बालिकेसिर में रविवार की शाम 6.1 तीव्रता का भूकंप आया जिसमें बड़ी तबाही मची है। जानकारी के मुताबिक भूकंप से कई इमारतें ढह गईं और एक व्यक्ति की मौत हो गई। तुर्की के गृह मंत्री ने बताया कि भूकंप के केंद्र सिंदिरगी शहर में मलबे से निकाले जाने के कुछ ही देर बाद 81 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि भूकंप के झटकों के कारण 16 इमारतें ढह गईं और 29 लोग घायल हो गए हैं। तुर्की की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बताया कि भूकंप स्थानीय समयानुसार लगभग 19:53 बजे (16:53 GMT) दर्ज किया गया और इसके झटके इस्तांबुल तक महसूस किए गए।

राष्ट्रपति एर्दोगन ने ट्वीट कर कही ये बात

राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने एक बयान जारी कर प्रभावित सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और कहा कि सभी राहत प्रयासों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। उन्होंने एक्स पर लिखा “ईश्वर हमारे देश को किसी भी प्रकार की आपदा से बचाए।” खोज और बचाव अभियान अब समाप्त हो गया है, और गृह मंत्री ने कहा कि गंभीर क्षति या हताहत होने के कोई अन्य संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि, सिंदिरगी से प्राप्त तस्वीरों में बड़ी इमारतें पूरी तरह से ध्वस्त और मुड़ी हुई धातु और मलबे के विशाल ढेर दिखाई दे रहे हैं।

राहत और बचाव कार्य जारी है

अधिकारियों ने बताया कि सिंदिरगी शहर में केंद्र वाले इस भूकंप के झटके इस्तांबुल के उत्तर में लगभग 200 किलोमीटर (125 मील) दूर तक महसूस किए गए, जहां की आबादी 1.6 करोड़ से ज़्यादा है। येरलिकाया ने बताया कि इस क्षेत्र में कुल 16 इमारतें ढह गईं – जिनमें से ज़्यादातर जीर्ण-शीर्ण और अनुपयोगी थीं। उन्होंने बताया कि दो मस्जिदों की मीनारें भी गिर गईं। मंत्री ने बताया कि घायलों में से किसी की भी हालत गंभीर नहीं है। टेलीविज़न फुटेज में बचाव दल लोगों से शांति बनाए रखने का अनुरोध करते हुए दिखाई दे रहे हैं ताकि वे मलबे के नीचे जीवन के संकेतों को सुन सकें।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।