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सीनियर्स फैशन शो @ 6वां ASLI एजिंग फेस्ट: उम्र बढ़ने को परिभाषित करता स्टाइल, गरिमा और आत्मविश्वास

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

राष्ट्रीय, 25 सितम्बर 2025 — 6वें ASLI एजिंग फेस्ट का मुख्य आकर्षण रहा सीनियर्स फैशन शो, जिसने एक सशक्त संदेश दिया: 60 वर्ष के बाद का जीवन केवल वर्षों को जोड़ने के बारे में नहीं है, बल्कि उन वर्षों को ऊर्जा, आनंद और सार्थकता से जीने के बारे में है। यह किसी वापसी का अध्याय नहीं, बल्कि एक नवीन शुरुआत का अवसर है—नए अनुभव गढ़ने, व्यक्तित्व को आत्मविश्वास और गरिमा के साथ प्रदर्शित करने का मंच।

वरिष्ठ नागरिकों ने जब रैंप पर कदम रखा, तो ASLI (एसोसिएशन ऑफ सीनियर लिविंग इंडिया) ने दोहराया कि उम्र बढ़ना धीमा होने का संकेत नहीं, बल्कि जीवन को और गहराई से जीने, रिश्तों को मजबूत करने और बिना किसी हिचक के अपनी अभिव्यक्ति का उत्सव मनाने का नाम है। मुंबई के द ललित में आयोजित इस शाम ने जीवन के उत्तरार्ध को गरिमा, रचनात्मकता और उद्देश्य की यात्रा के रूप में पेश किया।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

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इस वर्ष का थीम महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित था, जिसे हॉट कूचर और प्रगतिशील डिज़ाइन के साथ नए रूप में प्रस्तुत किया गया। महिलाओं ने मंच को मेट गाला-प्रेरित लुक्स से रोशन किया, जिसमें परंपरा की शाश्वत छवि और आधुनिक सौंदर्यशास्त्र का अनूठा संगम दिखा। पुरुषों ने भी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई—मोर पंखों की बोल्ड डिजिटल प्रिंट्स वाले परिधानों के साथ, ऐतिहासिक पेशवा पगड़ी से प्रेरित हेडगियर पहनकर—जो विरासत और आधुनिक परिष्कार का सुंदर मेल था।

जश्न और पुनर्नवाचार की भावना

पुनर्नवाचार की इस भावना को आगे बढ़ाया परांजपे स्कीम्स ने, जो सीनियर्स फैशन शो के गर्वित प्रायोजक रहे। इस शाम की खासियत रहे श्री शशांक परांजपे, जिनकी उपस्थिति ने संगठन की इस प्रतिबद्धता को रेखांकित किया कि बुढ़ापा आत्मविश्वास, अवसर और गरिमा से भरे जीवन का चरण है।

आंदोलन को गति देने वाले प्रायोजक

6वें ASLI एजिंग फेस्ट को दूरदर्शी प्रायोजकों के सामूहिक सहयोग ने शक्ति दी:

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प्लैटिनम प्रायोजक: परांजपे स्कीम्स और RTR (Ready to Retire, बाजाज कैपिटल द्वारा इनक्यूबेटेड)

सिल्वर प्रायोजक: अल्फिंड हेल्थकेयर, ब्रिजहेल्थ, क्रेडल ऑफ लाइफ, इमोहा एल्डरकेयर और हेयडे (हाउस ऑफ इन्कॉर द्वारा)

इन साझेदारों ने मिलकर भारत में एक समावेशी समाज के निर्माण की बढ़ती हुई मुहिम को मजबूती दी—ऐसा समाज जो अपने वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान करे, उन्हें सशक्त बनाए और उनके जीवन का उत्सव मनाए।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।