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भारतीय कॉर्पोरेट मामलों के संस्थान ने महानिदेशक की अध्यक्षता में कॉर्पोरेट मामलों और ईएसजी पर कोर वर्किंग ग्रुप का गठन किया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तत्वावधान में, भारतीय कॉर्पोरेट मामलों के संस्थान (आईआईसीए) ने आईआईसीए के महानिदेशक एवं सीईओ श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह की अध्यक्षता में कॉर्पोरेट मामलों और पर्यावरण, सामाजिक एवं शासन (ईएसजी) पर एक कोर वर्किंग ग्रुप (सीडब्ल्यूजी) का गठन किया है। यह कार्य कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) के निर्देशों के अनुसार किया गया है। इस समूह का गठन वैश्विक प्रथाओं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप कॉर्पोरेट प्रकटीकरण और शासन से संबंधित मामलों पर संरचित परामर्श और निर्णय लेने में सुविधा प्रदान करने के लिए किया गया है।

कोर वर्किंग ग्रुप के विचारार्थ विषयों में कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत प्रकटीकरण प्रावधानों की जांच, अंतर्राष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं की समीक्षा, बोर्ड स्तर पर ईएसजी निरीक्षण के लिए सिफारिशें, वैश्विक मानकों के साथ भारतीय मानदंडों का अभिसरण, हितधारक सहभागिता रूपरेखा, तथा ईएसजी पहलों के नवाचार, वित्तपोषण और प्रभाव आकलन के लिए सक्षमकारी उपाय शामिल हैं।

कोर वर्किंग ग्रुप की अध्यक्षता भारतीय कॉर्पोरेट मामलों के संस्थान के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने की। टाटा केमिकल्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री आर. मुकुंदन वरिष्ठ विशेषज्ञ सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे। इसके सदस्यों में आईओसीएल; एनटीपीसी लिमिटेड; श्नाइडर; इंफोसिस लिमिटेड, रिजर्व बैंक सूचना प्रौद्योगिकी लिमिटेड; आदित्य बिड़ला समूह, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, ओएनजीसी, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, टाटा स्टील; परामर्शदात्री फर्में; आईआईएम बैंगलोर और आईआईसीए के उद्योग विशेषज्ञ एवं शिक्षाविद शामिल हैं।

भारतीय कॉर्पोरेट मामलों के संस्थान के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट (एसबीई) की प्रमुख प्रो. गरिमा दाधीच सदस्य-संयोजक के रूप में कार्य करेंगी। स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट समूह के सचिवालय के रूप में कार्य करेगा और संस्थागत एवं तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।