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प्यारी यादों से लेकर उत्सव की उमंग तक: सोनी सब के कलाकारों ने क्रिसमस के उत्साह पर व्यक्त किए अपने विचार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई, दिसंबर 2025: क्रिसमस गर्मजोशी, एकजुटता और करुणा दिखाने का समय है – यह एक ऐसा उत्सव है जो दयालुता, कृतज्ञता और आशा के साझा मूल्यों के माध्यम से लोगों को एक साथ लाता है। जैसे ही घर रोशनी से जगमगाते हैं और दिल खुशी से भर जाते हैं, यह त्योहारी मौसम जीवन के साधारण सुखों को विराम देने, मनन करने और उनकी सराहना करने की एक कोमल याद दिलाता है। इस क्रिसमस, सोनी सब के प्रतिभाशाली कलाकार एक साथ आकर बता रहे हैं कि यह मौसम उनके लिए क्या मायने रखता है, अपनी प्यारी यादों, उत्सव की परंपराओं और दान की भावना पर विचार करते हैं जो इस दिन को परिभाषित करती है।

इत्ती सी खुशी में अन्विता की भूमिका निभाने वाली सुम्बुल तौकीर खान बताती हैं, “क्रिसमस मुझे हमेशा परीलोक की रोशनी, अंतिम क्षणों में बनने वाली योजनाओं और दोस्तों और परिवार के साथ बैठने की याद दिलाता है। छोटे उपहारों का आदान-प्रदान करना या भोजन एक-दूसरे के साथ साझा करना जैसी साधारण बातें भी खास लगती है। यह त्योहार हमें इन छोटे पलों की सराहना करने और जहाँ भी हम कर सकते हैं, खुशी फैलाने की याद दिलाता है।”

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इत्ती सी ख़ुशी में विराट की भूमिका निभाने वाले रजत वर्मा कहते हैं, “मैं क्रिसमस को सजे हुए घरों, बैकग्राउंड में बजते क्रिसमस गीतों, और प्रियजनों के साथ स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेने से जोड़ता हूँ। यह वह समय भी है जब आप अपनी दिनचर्या से रुकते हैं, लोगों से मिलते हैं, और बस एक साथ होने का आनंद लेते हैं। वह सरलता ही इस दिन को मेरे लिए सार्थक बनाती है।”

इत्ती सी ख़ुशी में इंस्पेक्टर संजय भोसले की भूमिका निभा रहे ऋषि सक्सेना कहते हैं, “मुझे यह पसंद है कि क्रिसमस किस तरह हर जगह एक खुशनुमा माहौल लाता है, सड़कों पर रोशनी से लेकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं देने वाले लोगों तक। चाहे वह एक छोटे से गेट-टूगेदर में शामिल होना हो, केक काटना हो, या बस घर पर एक आरामदायक शाम बिताना हो, यह सब खुशी और सकारात्मकता साझा करने के बारे में है। यहाँ तक कि सबसे साधारण पल, जैसे क्रिसमस संगीत सुनना या परिवार और दोस्तों के साथ बैठना, खास महसूस होते हैं। यह धीमा होने, आभारी होने और अपने आस-पास की खुशी का आनंद लेने का समय है।”

पुष्पा इम्पॉसिबल में प्रोफेसर राजवीर शास्त्री की भूमिका निभाने वाले गौरव चोपड़ा कहते हैं, “मेरे लिए, क्रिसमस साधारण परंपराओं, दोस्तों से मिलने, घर पर बने व्यंजनों का आनंद लेने और परिवार के साथ आराम करने के क्षणों की यादें वापस लाता है। उन शांत पलों में कुछ सुकून देने वाला होता है, चाहे वह एक लंबे दिन के बाद एक साथ बैठना हो या भोजन पर बातचीत साझा करना हो। यह एक अनुस्मारक है कि खुशी अक्सर धीमी होने और अपने आस-पास के लोगों के साथ उपस्थित रहने से मिलती है।”

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इत्ती सी ख़ुशी और पुष्पा इम्पॉसिबल देखें, हर सोमवार से शनिवार, केवल सोनी सब पर

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।