गुरुवार, जनवरी 22 2026 | 10:08:54 PM
Breaking News
Home / अंतर्राष्ट्रीय / भारत-जर्मनी वीजा समझौता 2026: अब भारतीयों को नहीं चाहिए ट्रांजिट वीजा, वर्क वीजा कोटा भी बढ़ा

भारत-जर्मनी वीजा समझौता 2026: अब भारतीयों को नहीं चाहिए ट्रांजिट वीजा, वर्क वीजा कोटा भी बढ़ा

Follow us on:

नई दिल्ली. जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की हालिया भारत यात्रा के दौरान भारत और जर्मनी के बीच हुए समझौते, विशेष रूप से ‘वीजा’ और ‘प्रतिभा आव्रजन’ (Talent Migration) को लेकर, दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ते हैं। अगर आप पढ़ाई, नौकरी या घूमने के लिए जर्मनी जाने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। भारत और जर्मनी के बीच हुए नए समझौतों ने भारतीय नागरिकों के लिए यूरोप की राह को और आसान बना दिया है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (Friedrich Merz) की भारत यात्रा के दौरान कुल 19 द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिनमें सबसे प्रमुख ‘वीजा फ्री ट्रांजिट’ और कुशल श्रमिकों की भर्ती है।

1. ट्रांजिट वीजा की अनिवार्यता खत्म

अब तक भारतीयों को जर्मनी के हवाई अड्डों से होकर किसी तीसरे देश (जैसे अमेरिका या कनाडा) जाने के लिए ‘एयरपोर्ट ट्रांजिट वीजा’ की आवश्यकता होती थी। नए समझौते के तहत, अब भारतीय यात्रियों को जर्मनी में ट्रांजिट के दौरान इस वीजा से छूट मिलेगी। इससे यात्रियों का समय और पैसा दोनों बचेगा।

2. ‘स्किल मोबिलिटी’ पर जोर: भारतीयों के लिए 90,000 वीजा

जर्मनी अपनी अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए भारतीय पेशेवरों पर भरोसा कर रहा है। जर्मनी ने भारतीयों के लिए कुशल कार्य वीजा (Skilled Labor Visa) का कोटा बढ़ाकर सालाना 90,000 करने का निर्णय लिया है। पहले यह कोटा केवल 20,000 था।

  • प्रमुख क्षेत्र: आईटी (IT), इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा (नर्सिंग), और विनिर्माण (Manufacturing)।

3. छात्रों के लिए विशेष सुविधाएं

जर्मनी में पढ़ रहे भारतीय छात्रों (जो वहां विदेशी छात्रों का सबसे बड़ा समूह हैं) के लिए पढ़ाई के बाद वहां रुकने और नौकरी खोजने की प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जाएगा। डिजिटल वीजा (Digital Visa) प्रक्रिया को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि लंबी कागजी कार्यवाही से बचा जा सके।

4. सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग

वीजा के अलावा, दोनों देशों के बीच ‘गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान’ और ‘आपसी रसद सहायता’ (Mutual Logistics Support) को लेकर भी समझौते हुए हैं। जर्मनी अब भारत को अपना प्रमुख रणनीतिक साझेदार मान रहा है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

5. ग्रीन हाइड्रोजन और टेक्नोलॉजी

भारत और जर्मनी के बीच ‘ग्रीन हाइड्रोजन रोडमैप’ पर भी सहमति बनी है। जर्मनी भारत को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई तकनीक और निवेश प्रदान करेगा।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

ग्रीनलैंड और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव

Trump at Davos 2026: यूरोप से ट्रेड वॉर और भारत के लिए ‘ग्रेट डील’ का संकेत, क्या बदलेगी वैश्विक अर्थव्यवस्था?

वाशिंगटन. दावोस (WEF 2026) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संबोधन वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के …